उदयपुर के मंदिर | Udaipur Mandir GK

Udaipur Mandir GK

एकलिंगजी मंदिर

उदयपुर से 21 किमी. दूर मेवाड़ के महाराणाओं के इष्टदेव श्री एकलिंगजी (शिवजी) की काले पत्थर से निर्मित चौमुखी मूर्ति वाला यह मंदिर कैलाशपुरी में स्थित है। इसका निर्माण बप्पा रावल द्वारा 734 ई. में करवाया गया।

मंदिर को वर्तमान स्वरूप महाराणा रायमल ने प्रदान किया। यह उदयपुर राजाओं के कुलदेवता का मंदिर कहलाता है। मंदिर के चारों ओर विशाल परकोटा है। यहाँ शिवरात्रि को विशाल मेला लगता है। यह मंदिर राज्य में पाशुपत सम्प्रदाय का सबसे प्रमुख स्थल है।

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जगत

उदयपुर से लगभग 55 किमी. दूर स्थित इस स्थान को बेहतरीन मूर्तिकला के कारण खजुराहो के समकक्ष माना जाता है। यहाँ स्थित अम्बिका देवी का मंदिर (10वीं शताब्दी की) का निर्माण नागर शैली में किया गया है। इस मंदिर में नृत्य करते हुए गणेश जी की विशाल प्रतिमा स्थापित है। इस मंदिर को राजस्थान का दूसरा खजुराहो’ और ‘मेवाड़ का खजुराहो’ भी कहा जाता है।

ऋषभदेव

धुलैव स्थान पर आदिनाथजी ( ऋषभदेवजी ) का मंदिर स्थित है। इस मंदिर में संसार में सर्वाधिक केशर चढ़ाने से यह केसरियानाथ जी का मंदिर कहलाता है। ऋषभदेव जी के मंदिर में मूर्ति काले पत्थर की है अतः यह कालाजी मंदिर ( कालिया बावजी ) कहलाता है।

धूला भील द्वारा मूर्ति लाने पर धुलेव देव भी कहलाता है। मंदिर का विशाल परिसर संगमरमर पत्थर से निर्मित है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यह 1100 खंभों पर निर्मित है जिसमें कहीं भी चूने का जोड़ नहीं है। मंदिर में डेढ़ लाख आकृतियाँ हैं। सम्पूर्ण भारत में ऋषभदेव जी का मंदिर ही एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसमें जैन, आदिवासी, वैष्णव तथा मुस्लिम समान रूप से पूजा करते हैं। यहाँ चैत्र मास की अष्टमी को विशाल मेला लगता है।

सास-बहू का मंदिर

10वीं सदी में निर्मित यह मंदिर नागदा (उदयपुर) में स्थित है। यह मूलत: सहस्रबाहु ( भगवान विष्णु ) का मंदिर है। यह मंदिर सोलंकी व महामारू शैली में निर्मित है।

जावर का विष्णु मंदिर

मेवाड़ शासक महाराणा कुम्भा की पुत्री रमाबाई द्वारा पंचायतन शैली में निर्मित मंदिर। इस मंदिर के शिल्पी एवं सूत्रधार ईश्वर थे।

जगदीश मंदिर (उदयपुर)

राजमहल के मुख्य द्वार बड़ी पोल से 175 गज की दूरी पर स्थित इस वैष्णव मंदिर का निर्माण 1651 में जगतसिंह प्रथम ने करवाया। इस मंदिर का निर्माण अर्जुन, सूत्रधार भाणा और उसके पुत्र मुकुन्द की देखरेख में हुआ। इस मंदिर में प्रभु जगन्नाथ राय की काले कसौटी पत्थर की मूर्ति विराजमान है।

इस मंदिर के निर्माण में स्वप्न संस्कृति का बड़ा महत्वपूर्ण योग रहा है। इसलिए इसे सपने से बना मंदिर भी कहते हैं। यह मंदिर पंचायतन शैली में निर्मित है। मंदिर में काले पत्थर से निर्मित भगवान जगदीश की भव्य मूर्ति है। 80 फुट ऊंचे प्लेटफॉर्म पर निर्मित यह मंदिर 50 कलात्मक स्तम्भों पर अवस्थित है। इसके चारों कोणों में शिव, पार्वती, गणपति आदि के चार लघु मंदिर हैं।

स्कंध कार्तिकेय मंदिर

तनेसर (उदयपुर) में छठी शताब्दी में निर्मित कार्तिकेय का मंदिर

मछदरा (संइया) मंदिर

उदयपुर में स्थित।

ईडाणा माता मंदिर

बंबोरा (उदयपुर) में स्थित चमत्कारी शक्ति स्थल। यहाँ ईडाणा माता अक्सर अग्नि स्नान करती है।

आहड़ के जैन मंदिर

10वीं सदी में निर्मित जैन मंदिरों का समूह। आचार्य जगच्चन्द्र सूरि ने यहाँ 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की।

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