बीकानेर के मंदिर | Bikaner Mandir GK

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भांडासर जैन मंदिर

सैंकड़ों मन देशी घी की नींव पर बना यह कलात्मक मंदिर 5वें जैन तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथजी का है। यह मंदिर घी वाला मंदिर के नाम से जाना जाता है।

इसके निर्माता शाह भांडा थे जिन्होंने संवत् 1468 में इसका निर्माण करवाया। मंदिर के केन्द्र में सुमतिनाथजी की श्वेत धवल-संगमरमर की आदमकद मूर्ति स्थापित है जिसके चारों ओर काँच का सुन्दर काम किया हुआ है। इस मंदिर को त्रिलोक दीपक प्रसाद मंदिर भी कहा जाता है।

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भंडेश्वर-संडेश्वर मंदिर

14वीं सदी में दो जैन भाइयों द्वारा बनाये गये जैन मंदिर। इनमें कांच का सुन्दर काम एवं सुनहरी पेंटिग दर्शनीय है।

कोडमदेसर

यहाँ भैंरूजी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।

करणी माता का मंदिर

देशनोक (बीकानेर) में स्थित है। करणी माता मंदिर को चूहों का मंदिर भी कहा जाता है। करणी माता बीकानेर के राठौड़ों की कुलदेवी है। करणी माता के मंदिर में पाए जाने वाले सफेद चूहों को ‘काबा’ कहा जाता है। इस मंदिर के पुजारी केवल चारण जाति के ही होते हैं।

कपिल मुनि का मंदिर

कोलायत (बीकानेर) में सांख्य दर्शन के प्रणेता कपिल मुनि का मंदिर है। इस मंदिर के निकट स्थित सरोवर के किनारे 52 घाट और 5 मंदिर निर्मित हैं। यहाँ कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेला भरता है जिसमें कोलायत झील में दीपदान का कार्यक्रम देखने लायक होता है। यह जांगल प्रदेश का सबसे बड़ा मेला है।

हेरम्ब गणपति मंदिर

बीकानेर के जूनागढ़ दुर्ग में 33 करोड़ देवताओं का मंदिर स्थित है, जिसमें दुर्लभ हेरम्ब गणपति मंदिर प्रमुख है। इस मंदिर की विलक्षण बात यह है कि इसमें गणपति चूहे पर सवार न होकर सिंह पर सवार है। इस मंदिर का निर्माण बीकानेर शासक अनूपसिंह ने करवाया।

अंता देवी का मंदिर

इस मंदिर में ऊंट पर आरूढ़ देवी की प्रतिमा है।

सूसानी देवी का मंदिर

मोरखाणा में स्थित जैन मंदिर। यह मंदिर केन्द्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक है।

लक्ष्मीनारायण मंदिर

राव लूणकरण द्वारा निर्मित मंदिर। इस मंदिर में विष्णु जी एवं लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित है।बीकानेर के अन्य मंदिरों में नेमीनाथ का मंदिर, धूनीनाथ का मंदिर, रसिक शिरोमणि का मंदिर, सुनारी माता का मंदिरसांडेश्वर मंदिर आदि प्रमुख हैं।

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