चूरू के मंदिर | Churu Mandir GK

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स्यानण का मंदिर

रतनगढ़-सालासर मार्ग के पूर्व में लगभग 300 मीटर ऊँची पहाड़ी पर स्यानण की डूंगरी पर स्थित प्रसिद्ध काली माता का मंदिर

सालासर बालाजी मंदिर

मोहनदास जी नामक किसान द्वारा सुजानगढ़ तहसील में सालासर नामक स्थान पर स्थापित हनुमानजी का प्रसिद्ध मंदिर। इनको 1757 ई. में आसोटा ग्राम के खेत में हल चलाते समय बालाजी की मूर्ति प्राप्त हुई। यहाँ स्थित हनुमान मूर्ति में केवल शीश की पूजा की जाती है।

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दाढ़ी-मूंछ युक्त यह हनुमान विग्रह विशेष दर्शनीय है। दाढ़ी में एक भव्य हीरा चमकता है। यह स्थान सिद्ध हनुमत पीठ माना जाता है। यहाँ प्रतिवर्ष दो मेले लगते हैं जिनमें दूर-दर से हजारों लोग मनौती मांगने आते हैं।

सालासर बालाजी के मंदिर का आरम्भिक निर्माण कार्य 2 मुस्लिम कारीगरों नूरा और दाउद ने किया।

वैंकटेश्वर (तिरूपति बालाजी) मंदिर

सुजानगढ़ में वैंकटेश्वर फाउण्डेशन ट्रस्ट के श्री सोहन लाल जानोदिया द्वारा 2 करोड़ रुपये की लागत से 1994 में निर्मित मंदिर। दक्षिण भारत के मंदिरों की स्थापत्य कला के विशेषज्ञ डॉ. एम. नागराज एवं वास्तुविद् डॉ. वैंकटाचार्य की देखरेख में इस मंदिर का निर्माण हुआ।

गोगाजी का मंदिर

ददरेवा (चूरू) में स्थित। ददरेवा में गोगाजी का शीश आकर गिरा था इसी कारण इसे शीशमेड़ी कहा जाता है। यहाँ प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्णा नवमी को मेला भरता है।

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