रणथम्भौर दुर्ग | Ranthambore Fort

रणथम्भौर दुर्ग

  • सवाईमाधोपुर जिले में अरावली पर्वतमालाओं से घिरा हुआ गिरिवन दुर्ग है।
  •  निर्माण :- 8वीं शताब्दी में चौहान शासकों द्वारा। ( रणथम्मनदैव चौहान )
  •  यह दुर्ग विषम आकार वाली सात पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
  •  इस दुर्ग के बारे में अबुल फजल ने लिखा है कि – ‘अन्य सब दुर्ग नंगे हैं, जबकि यह दुर्ग बख्तरबंद है।’

Ranthambore Fort

इस दुर्ग में प्रसिद्ध गणेश जी का मंदिर, पीर सदरुद्दीन की दरगाह, सुपारी महल, जौरां-भौरां (अन्न भंडार), जोगी महल, बादल महल, हम्मीर महल, हम्मीर की कचहरी, रनिहाड़ तालाब प्रमुख है।

दुर्ग से जुड़े विशिष्ट शब्द

  • पाशेब :- दुर्ग में विशिष्ट चबूतरे।
  • गरगच, मगरबी :- दुर्ग से ज्वलनशील पदार्थ फेंकने के यंत्र।
  • अर्शदा :- दुर्ग से पत्थरों की वर्षा करने वाला यंत्र।
  • अकबर ने इस दुर्ग में ‘सिक्का ढालने की टकसाल’ स्थापित की।
  • दुर्ग की परिधि :- 7 मील
  • दुर्ग का वास्तविक नाम :- रन्त:पुर अर्थात् रणकी घाटी में स्थित नगर।
  • 32 खम्भों की छतरी इसी दुर्ग में है। (हम्मीर देव द्वारा निर्मित)।
  • प्रवेश द्वार :- नौलखा दरवाजा, हाथी पोल, गणेश पोल, सूरज पोल, त्रिपोलिया
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