राजस्थान के भौगोलिक प्रदेश

भौगोलिक प्रदेश

भौगोलिक अध्ययन का एक विशेष स्वरूप ‘प्रदेशों का अध्ययन’ करना हैं इसके अन्तर्गत किसी भी क्षेत्र के भौगोलिक तत्वों के संश्लेषण तथा समाकलन के आधार पर प्रदेशों का परिसीमन किया जाता है।

Geographical Partition of Rajasthan

सामान्यत: धरातल, जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति, मृदा, कृषि, उद्योग, खनिज खनन आदि कारकों की सामान्य विशेषताओं के आधार पर भौगोलिक प्रदेशों का निर्धारण होता हैं।

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राजस्थान को भाैगोलिक प्रदेशों में विभक्त करने का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य प्रो. V. C. मिश्रा ने किया। V. C. मिश्रा के पश्चात प्रो. R. L. सिंह ने राजस्थान के प्रादेशिक विभागों का विस्तृत विवेचन किया।

प्रो. V. C. मिश्रा के अनुसार राजस्थान के भौगोलिक प्रदेश

 प्रो. V. C. मिश्रा ने राजस्थान को 7 भौगोलिक प्रदेशों में विभाजित किया हैं जो निम्नांकित हैं :-

क्र. सं.भौगोलिक प्रदेशविशेषताजिले
1.पश्चिमी शुष्क प्रदेश(i) शुष्क रेगिस्तानी मैदान (ii) वार्षिक वर्षा :- 15-25 CM(iii) राज्य में सबसे बड़ा प्रदेश (iv) बालुका स्तूपों द्वारा परिलक्षित (v) ग्रीष्म ऋतु में तापक्रम – 28°C_32°C (vi) प्रमुख फसल :- बाजरा, दाल व तिलहन (vii) थारपारकर व राठी नस्ल के पशु की उपस्थिति (viii) जिप्सम, प्राकृतिक गैस, खनिज तेल के उत्पादन क्षेत्रजैसलमेर, बाड़मेर, दक्षिणी-पूर्वी बीकानेर, दक्षिणी-पश्चिमी चूरू, पश्चिमी नागौर
2.अर्द्धशुष्क प्रदेश(i) अरावली के पश्चिम में स्थित(ii) वार्षिक वर्षा :- 25-30 सेमी.(iii) इसकी उत्तरी सीमा 50 CM वर्षा रेखा द्वारा निर्धारित है।(iv) उच्च तापक्रम(v) फसलें :- ज्वार, तिलहन, बाजरा(vi) पशुधन में धनी प्रदेश(vii) अधात्विक खनिजों में धनी(viii) मुख्य समस्या :- पानी की कमीजालौर, पाली, नागौर, सीकर, झुंझुनूं, उत्तरी-पूर्वी चूरू व दक्षिणी-पूर्वी जोधपुर
3.नहरी प्रदेश(i) सिंचित रेगिस्तानी मैदान(ii) वार्षिक वर्षा :- 15-25 सेमी।(iii) यह प्रदेश इन्दिरा गाँधी नहर एवं गंगनहर से सिंचित क्षेत्र(iv) फसलें :- गेहूँ, जौ, चना, गन्ना, बाजरा(v) कृषि आधारित अर्थव्यवस्थाश्रीगंगानगर, पश्चिमी बीकानेर, उत्तरी जैसलमेर
4.अरावली प्रदेश(i) अरावली पहाड़ियाँ व शृंखलाएँ(ii) वर्षा :- 30-60 Cm(iii) मिट्‌टी :- लाल-पीली मृदा(iv) खनिज सम्पदा में धनी(v) गेहूँ, ज्वार, मक्का, जौ, चना, दालों की कृषि(vi) प्रमुख फसल :- मक्काउदयपुर, दक्षिणी – पूर्वी पाली सिराेही, पश्चिमी डूंगरपुर
5.पूर्वी कृषि औद्योगिक प्रदेश(i) मैदानी व पठारी अर्द्धशुष्क प्रदेश(ii) वर्षा :- 50 Cm से अधिक(iii) प्रदेश की पश्चिमी सीमा 50 Cm से निर्धारित(iv) बनास एवं सहायक नदियों का प्रवाह क्षेत्र(v) मृदा :- कांपीय, लाल और पीला मृदा(vi) मुख्य आर्थिक क्रियाएँ :- कृषि एवं उद्योग(vii) फसलें :- गेहूँ, ज्वार, बाजरा, सरसों, राई, चना और दालें(viii) सिंचाई सुविधाएँ पर्याप्तजयपुर, अजमेर, सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, बूँदी, अलवर, भरतपुर, धौलपुर
6.दक्षिणी पूर्वी कृषि प्रदेश(i) विन्ध्यन व लावा पठार(ii) वर्षा :- 50 Cm से अधिक(iii) मृदा :- मध्यम काली मि‌ट्‌टी(iv) व्यवसाय :- कृषि(v) चम्बल एवं उसकी सहायक नदियों का प्रवाह क्षेत्र(vi) फसलें :- गेहूँ, ज्वार, मक्का, चना व तिलहन(vii) रेल सेवा का बहुत ही अभावपूर्वी डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, कोटा, झालावाड़
7.चम्बल बीहड़ प्रदेश(i) चम्बल के सहारे स्थित प्रदेश(ii) बीहड़ों की अधिकता(iii) प्रदेश में नवीन कांपीय जमावों की उपस्थिति(iv) चम्बल घाटी का ढाल दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है(v) मिट्‌टी अपरदन की समस्या से पीड़ित प्रदेश(vi) 50 Cm से अधिक वार्षिक वर्षा(vii) कृषि के लिए अनुपजाऊसवाईमाधोपुर, धौलपुर
प्रो. V. C. मिश्रा के अनुसार राजस्थान के भौगोलिक प्रदेश

 प्रो. V. C. मिश्रा के अलावा प्रो. रामलोचन सिंह (1971) ने सम्पूर्ण भारत का प्रादेशीकरण करते समय राजस्थान को दो वृहद प्रदेशों में विभाजित किया गया था,

तत्पश्चात इनके चार उप-प्रदेश तथा 12 लघु प्रदेशों का वर्णन किया हैं। इनके विभाजन का आधार सम्पूर्ण भारत के सन्दर्भ में प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक समानता है।

डॉ. रामलोचन सिंह द्वारा प्रस्तावित प्रदेश

क्र. सं.वृहद प्रदेशउप प्रदेशलघु प्रदेश
1.राजस्थान का मैदान(i)मरुस्थलीय(क)जैसलमेर मरुस्थलीय
    (ख)बाड़मेर मरुस्थलीय
    (ग)बीकानेर मरुस्थलीय
  (ii)राजस्थान बांगड़ प्रदेश(क)घग्घर
    (ख)शेखावटी
    (ग)नागौर
    (घ)लूनी
2.राजस्थान का पठार(iii)अरावली प्रदेश(क)उत्तरी अरावली
    (ख)मध्य अरावली
    (ग)दक्षिणी अरावली
  (iv)चम्बल बेसिन(क)निम्न चम्बल
    (ख)मध्य चम्बल

राजस्थान का मैदान

इस मैदान की अवस्थिति 24°31′ उत्तर से 30°12′ उत्तरी अक्षांशों एवं 69°15′ पूर्व से 76°42′ पूर्व देशान्तरों के मध्य है।

यह मैदान सिन्ध तथा सतलज नदियों के सिंचित प्रदेश तथा अरावली के पूर्वी पार्श्वो के बीच विस्तृत है। कुल क्षेत्रफल :- 1,96,750 किमी.2

इसमें जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, बीकानेर, जालौर, हनुमानगढ़, गंगानगर, चूरू जिलों के समग्र भाग तथा पाली, सीकर, झुंझुनूं जिलों के पश्चिमी भाग सम्मिलित हैं। राजस्थान का मैदान दो उप-प्रदेशों में विभाजित किया जाता हैं।

मरुस्थलीय प्रदेश

जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर जिले तथा चूरू एवं जोधपुर जिले के पश्चिमी भागों पर विस्तृत।

शुष्क जलवायु, उच्च तापमान, कम वर्षा, प्राकृतिक वनस्पति बहुत कम, छोटे पत्तों की और प्राय: नुकीली झाड़ियों के रूप में होती हैं। उष्ण मरुस्थलीय जलवायु जो शुष्क व कठोर होती हैं। औसत तापमान ग्रीष्म ऋतु में 34° से अधिक व शीत ऋतु में 12°-16° सेल्सियस।

दैनिक ताप परिसर अधिक। इस प्रदेश में दिन काफी गर्म लेकिन रात्रियाँ अधिक ठण्डी होती हैं। अति अल्प वर्षा। वाष्पीकरण की दर अधिक। रैतीली बलुई मृदा की उपस्थिति। इस प्रदेश का ढ़ाल पूर्व से पश्चिम की ओर है तथा औसत ऊँचाई 150 मीटर से 300 मीटर है।

इस प्रदेश में काँटेदार झाड़ियाँ (बबूल, नागफनी, झरबेरी, कीकर, खेजड़ा) पाई जाती हैं। इस प्रदेश में जिप्सम, लिग्नाइट, मुल्तानी मिट्‌टी, तापसह मिटि्टयाँ आदि खनिज पाये जाते हैं। इस क्षेत्र में कम जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व कम, सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि दर, न्यूनतम लिंगानुपात की दशाएँ विद्यमान हैं।

मरुस्थली प्रदेश का प्रमुख उद्यम कृषि एवं पशुपालन है। इस प्रदेश में बाजरा, ज्वार, मूंग, मोठ आदि फसलें बोयी जाती हैं। इस प्रदेश में नहरों द्वारा सिंचाई सुविधा प्रदत्त है। पशुपालन इस प्रदेश का आर्थिक संसाधन है।

इस प्रदेश में ऊँट, गौवंश, (राठी, थारपारकर) भैंस, भेड़ (पूगल, मगरा, नाली) आदि पशु पाले जाते हैं। NH-15 इसी प्रदेश से गुजरता हैं। मरुस्थली प्रदेश को तीन भागों (जैसलमेर मरुस्थली, बाड़मेर मरुस्थली, बीकानेर मरुस्थली) में विभाजित किया गया हैं।

राजस्थान बागड़ प्रदेश

इस प्रदेश का अक्षांशीय विस्तार :- 24°30′ उत्तर से 30°15′ उत्तर देशान्तरीय विस्तार :- 72°30′ पू. से 76° पू. तक।

 इस प्रदेश में गंगानगर, चूरू के पूर्वी भाग, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, जोधपुर का पूर्वी भाग, पाली, जालौर तथा बाड़मेर के कुछ दक्षिणी भाग सम्मिलित हैं।

उत्तर में लवणीय झीलों की अधिकता एवं दक्षिण में तीव्र ढाल पहाड़ियाँ एवं विस्तृत कोपीय मैदान मिलते हैं। बागड़ प्रदेश के दक्षिणी भाग में लूणी व उसकी सहायक नदियाँ प्रवाहित होती हैं। शेष प्रदेश आंतरिक प्रवाह का क्षेत्र है।

इस प्रदेश की जलवायु मरुस्थलीय प्रदेशों की अपेक्षा अधिक अनुकूल है। इस प्रदेश में ग्रीष्म ऋतु में औसत तापमान 32°C से 36°C तथा शीत ऋतु में 10°C से 17°C तक पाये जाते हैं। वर्षा :- 20 से 40 Cm। उष्ण कटिबंधीय कांटेदार वनों की उपस्थिति।

रेतीली मृदा। जिप्सम, तांबा, नमक, टंगस्टन, ग्रेनाइट, पाइराइट, डोलोमाइट जैसे खनिजों की उपलब्धता। जनसंख्या घनत्व मध्यम (148-361) तक, न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि दर, औसत लिंगानुपात जैसी विशेषताओं युक्त प्रदेश है।

मुख्य व्यवसाय कृषि। प्रमुख फसलें :- बाजरा, दालें, गेहूँ, जौ, चना, तिलहन आदि। औद्योगिक गतिविधियाँ अभी प्रगतिशील दिशा में हैं। सड़क व यातायात का तीव्र विकास। इसे चार उप प्रदेशों (घग्घर मैदान, शेखावटी प्रदेश, नागौर प्रदेश, लूनी बेसिन प्रदेश) में विभाजित किया गया है।

राजस्थान का पठार

प्रो. रामलोचनसिंह ने राजस्थान को दो प्रदेशों में विभाजित किया जिसमें राजस्थान के मैदान के अतिरिक्त राजस्थान के पठार के रूप में सम्मिलित है। राजस्थान के पठार को दो उप-प्रदेशों में विभाजित किया गया है।

अरावली प्रदेश

अक्षांशीय विस्तार – 23°20′ से 28°20′ उत्तर देशान्तरिय विस्तार :- 72°10′ से 77° पूर्व।क्षेत्रफल :- 92,771 किमी.2 जनसंख्या :- 281.70 लाख

शामिल क्षेत्र :- अलवर, जयपुर, दौसा, अजमेर, भीलवाड़ा, रामसमन्द, उदयपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, सिरोही, खेतड़ी (झुंझुनूं), श्रीमाधोपुर, नीम-का-थाना (सीकर)।

इस प्रदेश का धरातल विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न हैं। इस प्रदेश के उत्तरी-पूर्वी भाग में पहाड़ियाँ चपटी तथा दो पहाड़ियों के बीच में उपजाऊ घाटियाँ मिलती हैं। यह प्रदेश साबरमती, मानसी-वाकल, बनास, साेम का उद्‌गम व प्रवाह स्थल है।

यह प्रदेश अरब सागर और बंगाल की खाड़ी प्रवाह क्रम के बीच जल विभाजक का कार्य करता है। इस प्रदेश में मिश्रित पर्णपाती और उपोष्ण सदाबहार वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। इस प्रदेश में धोकड़ा, बरगद, गूलर, आम, जामुन आदि के वृक्ष मिलते हैं।

यह प्रदेश पूर्व में आर्द्र जलवायु क्षेत्र तथा पश्चिम में शुष्क जलवायु क्षेत्र के बीच में स्थित होने के कारण एक संक्रमणक क्षेत्र हैं।

 ग्रीष्म तापमान :- 28° – 34°  शीत ऋतु तापमान :- 10° – 16°  वर्षा :- 40 – 80 Cm

इस प्रदेश में भूरी रेतीली कछारी मिट्‌टी, लाल-पीली मिट्‌टी, लाल लोमी मृदा पाई जाती है। खनिज सम्पदा की दृष्टि से सम्पन्न प्रदेश। इस प्रदेश में सीसा-जस्ता, लौह अयस्क, बेरीलियम, तांबा, अभ्रक, ऐस्बेस्टॉस, पन्ना, मैगनीज, संगमरमर आदि खनिज उपलब्ध हैं।

यह प्रदेश सर्वाधिक जनसंख्या अधिक घनत्व न्यून लिंगानुपात एवं मध्यम जनसंख्या वृद्धि दर के लक्षण परिलक्षित है। वालरा (स्थानांतरित कृषि) का प्रभाव। सिंचाई सुविधा अपर्याप्त।

प्रमुख फसलें :- मक्का, गेहूँ, दालें, राई एवं सरसों, मूंगफली, तिलहन आदि उद्योग-धन्धों की दृष्टि से सम्पन्न प्रदेश। इस प्रदेश में ताम्र, नमक उद्योग, सीमेन्ट, अभ्रक, रसायन उद्योगों की उपलब्धता। NH-8 इसी प्रदेश में से गुजरता है।

अरावली प्रदेश को तीन उप प्रदेशों (उत्तरी, मध्य एवं दक्षिणी अरावली) में विभाजित किया गया है। यह प्रदेश जनजातीय दृष्टि से विस्तृत सम्पन्न प्रदेश है।

चम्बल बेसिन प्रदेश

विस्तार :- 23°50′ उत्तर से 27°50′ उत्तर  75°15′ पूर्व से 78°15′ पूर्व। क्षेत्रफल :- 50,026 वर्ग किमी.। जनसंख्या :- 71.35 लाख  औसत घनत्व :- 143 प्रति वर्ग किमी. शामिल क्षेत्र :- भरतपुर, धौलपुर, सवाईमाधोपुर, करौली, बूँदी, बारां, झालावाड़, टोंक।

चम्बल नदी का प्रवाह क्षेत्र। चम्बल घाटी की स्थलाकृतियां पहाड़ियों और पठारों से निर्मित हैं। इस प्रदेश में बाढ़ के मैदान, नदी कागार, बीहड़ एवं अन्त: सरिता आदि स्थलाकृतियां पाई जाती हैं। कोटा एवं बूँदी के पठारी भाग विस्तृत एवं पथरीली उच्च भूमियाँ हैं जिनकी नदी घाटियों में कहीं-कहीं काली मिट्‌टी के जमाव पाये जाते हैं। बूँदी व मुकुन्दवाड़ा की पहाड़ियाँ इसी प्रदेश में हैं।

 जलवायु :- आर्द्र। वर्षा :- 60-100 Cm तापमान :- ग्रीष्म :- 32°C – 34°C शीत :- 14°C – 17°C

 शुष्क पतझड़ व सागवान के वन। प्रमुख वृक्ष :- धोकड़ा, आम, गूलर, जामुन, बबूल, बरगद।

मृदा :- लाल-कछारी मृदा, मध्यम काली एवं लाल-पीली मृदा। खनिज :- काँच बालु का, चीनी – मृत्तिका, चूने के पत्थर, लोहा, तांबा, सीसा-जस्ता, तामड़ा, बेन्टोनाइट्स आदि। जनसंख्या घनत्व :- टोंक (198) से भरतपुर (503) जनसंख्या वृद्धि दर :- झालावाड़ (19.57%) से कोटा (24.34%)

 प्रमुख फसलें :- कपास, चना, ज्वार, बाजरा, गेहूँ, व्यापारिक फसलें। सिंचाई सुविधा की दृष्टि से यह प्रदेश नहरों के द्वारा एवं कुओं के द्वारा सिंचित हैं।

निम्न चम्बल बेसिन

 पुन: तीन भागों में विभक्त

  • भरतपुर मैदान
  • करौली पठार
  • धौलपुर मैदान

चम्बल बेसिन में गौवंश की मेवात, रथ हरियाणा एवं मालवी नस्लें मिलती हैं। यह प्रदेश पशु सम्पदा की दृष्टि से अग्रणी प्रदेश है। चम्बल बेसिन औद्योगिक दृष्टि से पिछड़ा प्रदेश है। कोटा इस प्रदेश में अकेला ऐसा नगरीय क्षेत्र हैं, जहाँ रासायनिक उद्योग, इंजीनियरिंग उद्योग, सीमेन्ट उद्योग, थर्मल प्लान्ट, सूती वस्त्र उद्योग उपलब्ध हैं।

मध्य बनास बेसिन

चार लघु विभागों में विभाजित

  • निम्न बनास बेसिन
  • कोटा उच्च भूमि क्षेत्र
  • कोटा मैदान
  • ऊपरी माही मैदान

चम्बल बेसिन में परिवहन की स्थिति बड़ी दयनीय है क्योंकि यहाँ की स्थलाकृति तथा जल व्यवस्था संबंधी कठिनाईयाँ इसके विकास में अवरोधक रही हैं। NH-11 व NH-3 इस प्रदेश के प्रमुख NH हैं। चम्बल बेसिन प्रदेश को दो भागों में बाँटा गया हैं :-

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