राजस्थान के प्रमुख शोध संस्थान एवं संग्रहालय

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Table of Contents

राजस्थान में वर्ष 1950 में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की स्थापना की गई। इस विभाग के अंतर्गत लगभग 320 से अधिक संरक्षित स्थल, 20 संग्रहालय, एक कला दीर्घा तथा 47 पुरातात्विक स्थल हैं।

एल्बर्ट हॉल म्यूजियम | albert hall museum jaipur history in hindi

  • जयपुर के रामनिवास बाग में स्थित।
  • निर्माण :- 1876 ई. में जयपुर शासक सवाई रामसिंह द्वितीय के समय।
  • शुरुआत :- 1876 ई. में प्रिन्स एल्बर्ट द्वारा।
  • लागत :- 4 लाख रुपये।
  • डिजाइनकर्त्ता :- सर सैम्यूल स्विंटन जैकब
  • भारतीय एवं फारसी (मुगल) शैली में निर्मित।
  • राजस्थान का प्रथम एवं सबसे बड़ा संग्रहालय
  • इस संग्रहालय को सन् 1887 में सर एडवर्ड बेडफोर्ड द्वारा विधिवत उद्‌घाटन कर जनता के लिए खोल दिया गया।
  • इस संग्रहालय में मिस्र की प्राचीनकालीन ममी रखी हुई है। यह ममी जयपुर में पैनोपोलिस (मिस्र) से लाई गई थी। यह ममी ‘तूतू’ नामक महिला की ममी है जो खेम नामक देव के उपासक पुरोहितों के परिवार की सदस्या थी।
  • इस संग्रहालय में ईरान के शाह द्वारा मिर्जा राजा जयसिंह को भेंट किया गया दुनिया का अप्रतिम बहुमूल्य गलीचा रखा हुआ है।
  • एल्बर्ट हॉल देश की एकमात्र ऐसी इमारत है जिसमें कई देशों की स्थापत्य शैली देखने को मिलती है।
  • इस संग्रहालय में सन् 1506 से 1922 तक के जयपुर के राजाओं के चित्र एवं राज्य चिह्न रखे हुए हैं।
  • इस संग्रहालय में कई पुराने चित्र, दरियां, हाथीदाँत, कीमती पत्थर, धातु मूर्तियाँ एवं रंग-बिरंगी वस्तुएँ भी रखी हुई हैं।
  • वर्ष 2018 में राजस्थान के मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री का शपथ समारोह एल्बर्ट हॉल में आयोजित किया गया।

राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग

  • वर्ष 1950 में जयपुर में स्थापित।
  • यह विभाग प्रदेश में बिखरी हुई पुरा सम्पदा, सांस्कृतिक धरोहर की खोज, सर्वेक्षण तथा प्रचार-प्रसार का कार्य करता है।
  • इस विभाग द्वारा राजस्थान में 320 से ज्यादा स्मारक एवं पुरास्थल संरक्षित घोषित किए जा चुके हैं।
  • यह विभाग ‘द रिसर्चर’ नामक पत्रिका का प्रकाशन भी करता है।

अरबी फारसी शोध संस्थान

  • सन् 1978 में टोंक में स्थापित।
  • इस संस्थान में टोंक के नवाबों द्वारा संग्रहित हस्तलिखित ग्रंथों, दस्तावेजों, भाषा साहित्य तथा शासकीय रिकॉर्ड में पाए गए उर्दू, फारसी पुस्तकें एवं दस्तावेज संग्रहित हैं।
  • इस संस्थान में औरंगजेब की लिखी ‘आलमगीरी कुरान’ तथा शाहजहाँ द्वारा लिखवाई गई ‘कुराने कमाल’ नामक दुर्लभ पुस्तकें संग्रहित हैं।
  • वर्ष 1987 में अरबी फारसी शोध संस्थान का नाम बदलकर ‘मौलाना अबुल कलाम अरबी फारसी शोध संस्थान’ रखा गया।

राजस्थान राज्य अभिलेखागार

  • इतिहास की लिखित सामग्री को सुरक्षित करने के उद्देश्य से राजस्थान में वर्ष 1955 में जयपुर में राजस्थान राज्य अभिलेखागार की स्थापना की गई।
  • वर्ष 1960 में राजस्थान राज्य अभिलेखागार का मुख्यालय जयपुर से बीकानेर स्थानान्तरित कर दिया गया।
  • शाखाएँ :- भरतपुर, जयपुर, कोटा, उदयपुर, अलवर एवं अजमेर में हैं।
  • इन अभिलेखागारों में ऐतिहासिक, प्रशासनिक, सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक दृष्टि से उपयोगी एवं दुर्लभ सामग्री संग्रहित है।
  • इस अभिलेखागार में कोटा रियासत का 300 वर्ष पुराना अभिलेख संरक्षित है। यह अभिलेख राजस्थान की सबसे कठिन मानी जाने वाली हाड़ौती भाषा में लिखा हुआ है।

प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान

  • सन् 1964 में चूरू में स्थापित।
  • संस्थापक :- सुबोध कुमार अग्रवाल। (गोविन्दचन्द्र अग्रवाल के सहयोग से)
  • वर्तमान में यह संस्थान ‘राजस्थानी लोक कथा कोष’ के प्रकाशन का कार्य कर रहा है।
  • यहाँ पर प्राचीन मूर्तियों, सिक्कों, ताड़पत्रीय प्रतियों, हस्तलिखित पुस्तकों, प्राचीन लेखा बहियों का दुर्लभ संग्रह हैं।

नगरश्री लोक संस्कृति शोध संस्थान

  • सन् 1950-51 में जोधपुर में यह संस्कृत मण्डल के रूप में स्थापित किया गया।
  • इसे 1955 ई. में प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के रूप में पुनर्गठित किया गया। इसमें मुनि जिनविजय (किशनसिंह) की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
  • यह प्रतिष्ठान राजस्थान राज्य की पाण्डुलिपियों एवं प्राच्य विद्या की सामग्री का भण्डार है।
  • प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का मुख्य कार्य पाण्डुलिपियों का सम्पादन एवं प्रकाशन करना है।
  • इस प्रतिष्ठान द्वारा पाण्डुलिपियों का प्रकाशन ‘राजस्थान पुरातन ग्रंथमाला शृंखला’ के अंतर्गत किया जाता है।
  • इस प्रतिष्ठान द्वारा प्रकाशित ग्रंथों से राजस्थान के इतिहास एवं संस्कृति के अध्ययन में अमूल्य योगदान प्राप्त हुआ है।
    1. जोधपुर मुख्यालय
    2. बीकानेर शाखा (इस शाखा में मोतीचंद खजांची संग्रह एवं जिनचंद्र सूरी संग्रह संग्रहित है।)
    3. चित्तौड़ शाखा (वर्ष 1962-63 में स्थापित)
    4. जयपुर शाखा
    5. अलवर शाखा (वर्ष 1840 में महाराजा विनयसिंह के काल में स्थापित)
    6. कोटा शाखा
    7. उदयपुर शाखा
  • प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान को पोथीखाना या सरस्वती भण्डार के नाम से भी जाना जाता है।

विक्टोरिया हॉल म्यूजियम

  • गुलाब बाग (उदयपुर) में सन् 1887 में महाराणा फतेहसिंह के काल में निर्मित।
  • यह म्यूजियम सज्जन निवास बाग में स्थित है।
  • इस म्यूजियम का उद्‌घाटन 1890 ई. में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लेंसडाउन द्वारा किया गया।
  • इस म्यूजियम में शहजादा खुर्रम की पगड़ी सुरक्षित है।
  • यहाँ लगभग 8000 लघु चित्र एवं प्राचीनतम मेवाड़ी पगड़ियाँ सुरक्षित हैं।

सर छोटूराम स्मारक संग्रहालय

  • संगरिया (हनुमानगढ़) में स्थित।
  • संस्थापक :- स्वामी केशवानंद।
  • इस संग्रहालय में एक विशाल कमंडल, महाराजा रणजीतसिंह के दरबार एवं चैम्बर ऑफ प्रिंसेस की 14 फरवरी 1921 की फोटो संरक्षित है।
  • इस संग्रहालय का अवलोकन जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, श्रीमती इंदिरा गाँधी, चौधरी चरण सिंह जैसे प्रधानमंत्रियों ने किया।

करणी म्यूजियम

  • बीकानेर के जूनागढ़ दुर्ग के गंगानिवास में स्थित।
  • यहाँ बीकानेर के शासकों के जीवनवृत्त से जुड़ी घटनाओं के चित्र एवं बीकानेर का राज्य चिह्न रखे हुए हैं।
  • यहाँ राजा जयचंद द्वारा बनाया गया चंदन का सिंहासन मौजूद है।
  • यहाँ अस्त्रों-शस्त्रों का संग्रह भी मिलता है।

श्री रामचरण प्राच्य विद्यापीठ एवं संग्रहालय

  • जयपुर में 1960 ई. में स्थापित।
  • संस्थापक :- आचार्य रामचरण शर्मा ‘व्याकुल’।
  • इस संग्रहालय में अंतिम मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर के ज्येष्ठ पुत्र मिर्जा अब्दुल्ला का मूल काबेन नामा (वैवाहिक पत्र) सुरक्षित रखा हुआ है।
  • इस संग्रहालय में जयपुर का प्राचीनतम अखबार (सन् 1856) सुरक्षित है।
  • जयपुर की संरचना का पूर्ण विवरण एवं तत्संबंधी नक्शे इस संग्रहालय में सुरक्षित रखे हुए हैं।

गंगा गोल्डन जुबली म्यूजियम

  • महाराजा गंगासिंह के समय सन् 1937 में स्थापित।
  • उद्‌घाटनकर्त्ता :- लॉर्ड लिनलिथगो (तत्कालीन वायसराय)
  • इस म्यूजियम की स्थापना में इटली के विद्वान डॉ. एल. पी. टेस्सीटोरी का विशेष योगदान रहा।
  • इस संग्रहालय में पल्लू से प्राप्त संगमरमर की जैन सरस्वती की प्रतिमा आकर्षक है।
  • यहाँ उच्चकोटि के कलात्मक गलीचे, शुतुर्मुर्ग के अण्डों पर कलात्मक कार्य, तेल चित्र, ऊँट की खाल से निर्मित सामग्री संग्रहित है।

सार्दुल म्यूजियम

  • बीकानेर के लालगढ़ पैलेस में स्थित।
  • इस संग्रहालय में विश्व के विभिन्न देशों के सिक्कों का संग्रह मिलता है।
  • यहाँ पर संस्कृत ग्रंथ, राजस्थान की पाण्डुलिपियाँ सुरक्षित हैं।
  • यहीं पर पुरानी फिल्मों का पुस्तकालय एवं ‘प्रिंसेज गैलेरी’ में राजकुमार तथा राजकुमारियों द्वारा हस्ताक्षरयुक्त चित्र प्रदर्शित किए गए हैं।

सिटी पैलेस संग्रहालय

  • जयपुर के राजमहल के एक भाग में स्थित।
  • निर्माता :- सवाई मानसिंह द्वितीय द्वारा सन् 1959 में।
  • इस संग्रहालय को सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय भी कहा जाता है।
  • इस संग्रहालय में दीवान-ए-आम को आर्ट गैलेरी के रूप में स्थानांतरित किया गया है। जहाँ जयपुर के सभी महाराजाओं के आदमकद पोट्रेट लगे हुए हैं।
  • इस संग्रहालय में मिर्जा राजा जयसिंह द्वारा लाहौर से मँगवाया हुआ पर्दा, सवाई जयसिंह की विख्यात कश्मीरी शॉल, रजाईयाँ, चौगा सुरक्षित हैं।
  • इसमें विश्व का दूसरा सबसे बड़ा झूमर लगा हुआ है।
  • इस पैलेस में दुनिया के विशालतम चाँदी के दो जार रखे हुए हैं जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

सिटी पैलेस म्यूजियम (उदयपुर)

  • निर्माण :- महाराणा भगवंतसिंह द्वारा।
  • यह उदयपुर राजपरिवार का निजी संग्रहालय है।
  • इस संग्रहालय में हल्दीघाटी, चेतक एवं प्रताप कक्ष हैं।
  • इस म्यूजियम के अन्दर स्थित चंद्र महल में संगमरमर का ‘लक्खु कुंड’ स्थित है जिसमें राजतिलक होने पर एक लाख चाँदी के सिक्के डाले जाते थे।
  • इस संग्रहालय में राणा सांगा द्वारा बाबर से हड़पे गए ‘वदी के बाजे’ रखे हुए हैं।
  • इस संग्रहालय में महाराणा फतेहसिंह का चित्र एवं दिल्ली दरबार 1911 में फतेहसिंह के लिए आरक्षित कुर्सी भी सुरक्षित है।

राजकीय संग्रहालय (भरतपुर)

  • निर्माण :- लौहागढ़ दुर्ग में सन् 1944 में महाराजा ब्रजेन्द्र सिंह द्वारा।
  • संग्रहालय में नोह से प्राप्त कुषाण कालीन पूर्ण बोधिसत्व प्रतिमा, वैर से प्राप्त दसवीं शताब्दी की देवी चक्रेश्वरी की प्रतिमा, कामा से प्राप्त गुप्तोत्तर काल की शिव-पार्वती की प्रतिमा सुरक्षित है।
  • इस संग्रहालय में चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से 20वीं सदी तक के स्वर्ण, रजत, ताम्र एवं मिस्र धातु के सैंकड़ों सिक्के संग्रहित हैं।
  • इस संग्रहालय में पाँच फीट लम्बी कुषाणकालीन एकमुखी शिवलिंग रखा हुआ है।
  • यह संग्रहालय प्रस्तर प्रतिमाओं का अनूठा भण्डार है।

राजकीय प्रताप संग्रहालय (उदयपुर)

  • निर्माण :- सन् 1873 में महाराणा शंभूसिंह के समय स्थापित।
  • कर्नल हेचिन्सन ने इस संग्रहालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • इस संग्रहालय में छपाई, हाथीदाँत के कलात्मक नमूने, मेवाड़ी पगड़ियाँ एवं मेवाड़ चित्रकला के 800 लघु चित्र सुरक्षित हैं।
  • इस संग्रहालय में ‘कलीला दमना’पंचतंत्र’ ‘मुल्ला दो प्याजा’ पर आधारित लघु चित्र भी सुरक्षित है।

राजकीय संग्रहालय (झालावाड़)

  • निर्माण :- सन् 1915 में भवानीसिंह द्वारा।
  • हाड़ौती क्षेत्र का प्रथम संग्रहालय।
  • इस संग्रहालय में प्रस्तर प्रतिमाएँ (वैष्णव, जैन एवं शाक्त) प्रदर्शित की हुई हैं।
  • इस संग्रहालय में रक्त पाषाण पर चतुर्बाहु प्रतिमा सुरक्षित है जो 1982 ई. में लंदन में आयोजित भारत महोत्सव में प्रदर्शित की गई।

श्री बागड़ राजकीय संग्रहालय

  • स्थापना :- सन् 1982 में पाली में।
  • इस संग्रहालय में सुगाली माता की काली प्रतिमा रखी हुई है जिसके 10 सिर एवं 54 हाथ बने हुए हैं।
  • इस संग्रहालय में विभिन्न खनिजों के साथ-साथ पाषाण कालीन उपकरण एवं लघु पाषाण प्रतिमाएँ रखी हुई हैं।
  • इस संग्रहालय में 8वीं – 9वीं सदी की जीवंत स्वामी (महावीर) की प्रतिमा भी सुरक्षित है।

राजकीय संग्रहालय (कोटा)

  • स्थापना :- सन् 1946 में डॉ. मथुरालाल शर्मा के प्रयासों से।
  • इस संग्रहालय में इण्डोससेनियन, गधिया प्रकार के सिक्के अलाउद्दीन खिलजी, अकबर, औरंगजेब तथा झालावाड़ एवं बूँदी के सिक्के भी रखे हुए हैं।
  • वर्तमान में बृज भवन पैलेस में स्थित है।

राजपूताना म्यूजियम

  • अजमेर के ‘अकबर का किला’ (मैग्जिन दुर्ग) में स्थापित।
  • उद्‌घाटन :- सन् 1908 में AGG काल्विन द्वारा।
  • इस संग्रहालय में गुप्तकाल से 16वीं सदी तक की मूर्तियाँ संग्रहित हैं।
  • इस संग्रहालय में बरली का शिलालेख, प्रतिहार राजा बाउक का शिलालेख संरक्षित है।
  • इस संग्रहालय में पूर्व ऐतिहासिक काल के आहत सिक्के भी मौजूद हैं।

सरदार म्यूजियम

  • सन् 1909 में जोधपुर में स्थापित।
  • सन् 1917 में महाराजा सुमेरसिंह द्वारा अपने पिता सरदारसिंह के नाम पर इसका नामकरण किया।
  • उद्‌घाटन :- लॉर्ड विलिंग्टन द्वारा सन् 1936 में।

अलवर संग्रहालय

  • सन् 1940 में अलवर राज्य के अंतिम शासक तेजसिंह के शासनकाल में निर्मित।
  • इस संग्रहालय की स्थापना में मेजर हार्वे का विशेष योगदान रहा।
  • यहाँ 11वीं – 12वीं सदी की प्रस्तर प्रतिमाएँ एवं शिलालेख मौजूद हैं।
  • इस संग्रहालय में शेख सादी की कृति गुलिस्तां एवं फिरदौसी की रचना शाहनामा इसी संग्रहालय में सुरक्षित है।

चित्तौड़गढ़ संग्रहालय

  • चित्तौड़ दुर्ग के फतेह प्रकाश महल में स्थित।
  • इसे सन् 1968 में संग्रहालय का रूप दिया गया।
  • इस संग्रहालय में 640 पाषाण प्रतिमाएँ, 18 धातु प्रतिमाएँ, 100 लघु चित्र एवं 2060 सिक्के संग्रहित हैं।

प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय

  • रामनिवास बाग (जयपुर) में स्थापित।
  • जीव-जन्तुओं, पक्षियों एवं प्राकृतिक संसार की जानकारी देने वाला प्रदेश का एकमात्र संग्रहालय है।
  • वन्य जीव विशेषज्ञ पद्‌मश्री कैलाश साँखला का इस संग्रहालय की स्थापना में विशेष योगदान रहा है।
  • प्राकृतिक इतिहास का तात्पर्य जीवों एवं वनस्पतियों की उत्पत्ति एवं विकास के वृतान्त से हैं।

कालीबंगा संग्रहालय

  • राज्य सरकार द्वारा कालीबंगा (हनुमानगढ़) में वर्ष 1985-86 में स्थापित संग्रहालय।
  • इस संग्रहालय में कालीबंगा के उत्खनन से प्राप्त पुरावशेषों को रखा गया है।

लोक सांस्कृतिक संग्रहालय

  • सन् 1984 में गड़सीसर (जैसलमेर) में स्थापित।
  • इस संग्रहालय में साधारण लोक जीवन से जुड़ी अमूल्य वस्तुओं का संग्रह हैं।

बिड़ला तकनीकी म्यूजियम

  • सन् 1954 में पिलानी (झुंझुनूं) में स्थापित।
  • यह देश का प्रथम उद्योग एवं तकनीकी म्यूजियम है।
  • इस म्यूजियम में कोयले की खानों का प्रदर्शन पूरे एशिया में अकेला माना जाता है।

मेहरानगढ़ संग्रहालय

  • मेहरानगढ़ दुर्ग (जोधपुर) में स्थापित।
  • यहाँ स्वर्गीय महेन्द्रसिंह के प्रयासों से राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में पहनी जाने वाली पागपगड़ियाँ रखी हुई हैं।
  • इस संग्रहालय में मखमल से निर्मित शाही मुगल तंबू (वस्त्र का ताजमहल) सुरक्षित है।
  • इस संग्रहालय में पाश्चात्य विद्वान आर्किवाल्ड मूर का बनाया बहुमूल्य तेल चित्र एवं ऐतिहासिक पालकी ‘महाडोल’ भी सुरक्षित है।

उम्मेद भवन पैलेस संग्रहालय

  • जोधपुर में सन् 1929 में महाराजा उम्मेदसिंह द्वारा अकाल की विभीषिका से राहत देने के उद्देश्य से इस संग्रहालय का निर्माण करवाया।
  • वास्तुकार :- एच. यू. लांचेस्टर एवं जे. आर. लॉज
  • छीत्तर पत्थर से निर्मित इस संग्रहालय में घड़ियों का एक अनूठा संग्रह भी है।
  • इस संग्रहालय में उम्मेदसिंह एवं हनुवंतसिंह के काल में हवाई उड़ानों के दौरान प्रयुक्त होने वाले एयर क्राफ्ट्स के विभिन्न मॉडल रखे हुए हैं।

नाहटा संग्रहालय

  • सरदार शहर (चूरू) में स्थित संग्रहालय।
  • इस संग्रहालय में स्व. मालचंद जांगिड़ एवं उनके परिवारजनों द्वारा उत्कीर्ण कलाकृतियाँ सुरक्षित हैं।
  • इस संग्रहालय में चंदन एवं हाथीदाँत की बारीक कारीगरी के लिए विख्यात कलाकृति संरक्षित है।

आहड़ संग्रहालय

  • आहड़ (उदयपुर) में स्थित।
  • इस संग्रहालय का संचालन राजस्थान पुरातत्व विभाग द्वारा किया जा रहा है।
  • इस संग्रहालय में 4000 वर्ष पूर्व की सभ्यता का प्रदर्शन है।

राव माधोसिंह ट्रस्ट संग्रहालय

  • कोटा में सन् 1970 में स्थापित इस संग्रहालय में कोटा एवं हाड़ौती अंचल की कला, संस्कृति एवं ऐतिहासिक धरोहर के वस्तुओं का संग्रह किया गया है।
  • इस संग्रहालय में वैधशाला एवं तंत्र-मंत्र से संबंधित उपकरण संग्रहित हैं।

गुड़ियाओं का संग्रहालय

  • जयपुर के मूक-बधिर विद्यालय के प्रांगण में स्थापित।
  • इस संग्रहालय का निर्माण 1979 ई. में भगवानी बाई सेखसरिया चेरिटी ट्रस्ट द्वारा किया गया।
  • यह ‘डॉल म्यूजियम’ के नाम से भी जाना जाता है।

लोकवाद्यों का संग्रहालय

  • संगीत नाटक अकादमी (जोधपुर) में स्थापित।
  • इस संग्रहालय में मारवाड़ अंचल के लोकवाद्यों का संग्रह किया गया है।

महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र

  • जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग में 2 जनवरी 1805 ई. को स्थापित।
  • इस शोध केन्द्र का मुख्य लक्ष्य कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में विद्यमान शोध सामग्री का
  • अनुसंधान आधुनिक दृष्टिकोण से करना है।

श्री सरस्वती पुस्तकालय

  • फतेहपुर (सीकर) में स्थापित पुस्तकालय।
  • इस पुस्तकालय में अनेक दुर्लभ ग्रंथ, साहित्यिक पुस्तकें, नक्शे, पाण्डुलिपियाँ, तांत्रिक ग्रंथ आदि उपलब्ध हैं।
  • यह पुस्तकालय श्री सरस्वती पुस्तकालय फतेहपुर ट्रस्ट द्वारा संचालित है।

हल्दीघाटी संग्रहालय

  • हल्दीघाटी (राजसमन्द) में स्थापित।
  • योजनाकार :- मोहनलाल श्रीमाली (शिक्षक)।
  • हल्दीघाटी संग्रहालय वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जीवन की घटनाओं और दृष्टांतों को विविध रूप में संजोकर ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण की दिशा में एक प्रयास है।
  • गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज।

जनजाति संग्रहालय

  • माणिक्यलाल वर्मा जनजाति शोध संस्थान (उदयपुर) में सन् 1983 में स्थापित।
  • इस संग्रहालय में विभिन्न जनजातियों की संस्कृति एवं सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था संरक्षित एवं प्रदर्शित है।
  • इस संग्रहालय के प्रवेशद्वार पर मेवाड़ का राजचिह्न ‘जो दृढ़ राखे धर्म को ताहि राखे करतार’ रखा हुआ है।

लोककला केन्द्र संग्रहालय

  • उदयपुर में भारतीय लोककला मण्डल परिसर में सन् 1963 में इस संग्रहालय की स्थापना की गई।
  • इस संग्रहालय में कठपुतलियों, राजस्थान के वस्त्रों एवं आभूषणों का संग्रह हैं।

पोथीखाना संग्रहालय

जयपुर में स्थित।

दिलाराम बाग संग्रहालय

  • इस राजकीय संग्रहालय की स्थापना सन् 1940 में हवामहल में की गई। सन् 1950 में आमेर के ‘दिल-ए-आराम बाग’ में स्थानान्तरित कर दिया गया।
  • इस संग्रहालय में रैढ़, बैराठ एवं सांभर के उत्खनन से प्राप्त सामग्री संग्रहित है।
  • इस संग्रहालय में महाकवि बिहारी की सतसई पर बने चित्र संग्रहित हैं।

संजय शर्मा संग्रहालय

  • जयपुर में सन् 1955 में स्थापित।
  • इस संग्रहालय में एक लाख पाण्डुलिपियाँ एवं हजारों कलाकृतियाँ संग्रहित हैं जिसमें पिछवाईयाँ, उड़ीसा के पटचित्र, वैदिक सामग्री आदि संग्रहित हैं।

बी. जी. शर्मा संग्रहालय

  • 13 अप्रैल, 1993 में नाथद्वारा शैली के चित्रकार बी. जी. शर्मा द्वारा स्थापित संग्रहालय।
  • इस संग्रहालय में एक ही कलाकार के 500 चित्र हैं जिसमें श्रीनाथजी का अन्नकूट उत्सव नामक चित्र प्रमुख है।

जवाहर कला केन्द्र

  • सन् 1993 में जयपुर में स्थापित।
  • इसमें प्रदर्शनकारी कलाओं, नृत्य, संगीत एवं नाट्य विद्याओं के साथ चित्र, मूर्ति शिल्प एवं अन्य शृंगारिक कलाओं का संग्रह हैं।

डूंगरपुर संग्रहालय

  • सन् 1973 में स्थापित।
  • इस संग्रहालय में विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ, शिलालेख, सिक्के, गुप्तकालीन प्रतिमाएँ, गहरे नीले रंग के पत्थर (पेरबा) एवं मोलेला निर्मित मिट्टी के देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ आदि सुरक्षित हैं।

राजकीय संग्रहालय (विराटनगर)

  • जयपुर के विराटनगर में सन् 1987 में स्थापित।
  • इस संग्रहालय में बैराठ के उत्खनन से प्राप्त सामग्री, पाषाण कालीन पत्थर के औजार, मृद्‌भाण्ड, सिक्के एवं राजस्थान में प्राप्त बौद्ध संस्कृति के अवशेष सुरक्षित है।

बागोर की हवेली संग्रहालय

  • उदयपुर में पिछोला झील के तट पर स्थित संग्रहालय।
  • यहाँ पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र का कार्यालय स्थापित है। इसमें सन् 1997 में संग्रहालय स्थापित किया गया।
  • इस संग्रहालय में गजानन्द की 700 वर्ष पुरानी मूर्ति भी सुरक्षित है।

जैसलमेर संग्रहालय

  • भादरिया पोकरण में स्थित यह संग्रहालय सर्वाधिक प्राचीन वस्तुओं का संग्राहक माना जाता है।
  • जैसलमेर के इस स्थान पर राजस्थान का सबसे बड़ा गैर-सरकारी पुस्तकालय स्थित है।
  • इस पुस्तकालय की स्थापना 1983 ई. में संत हरवंश सिंह निर्मल द्वारा की गई।

अम्बेडकर पीठ

  • 2007 में मूण्डला (जयपुर) में स्थापित।

जिनभद्र सूरी ज्ञान भण्डार

भवानी परमानंद राजकीय पुस्तकालय

  • झालावाड़ में स्थित।

राजकीय संग्रहालय (सीकर

  • 28 जून, 2006 को स्थापित।
  • इस संग्रहालय में गणेश्वर से प्राप्त बाणग्र, मछली पकड़ने के कांटे, ताम्र उपकरण, चूड़ियाँ, मणके, ताम्र कुल्हाड़ियाँ एवं अलंकृत मृद‌्भाण्ड सुरक्षित हैं।
  • इस संग्रहालय को राजकुमार हरदयालसिंह संग्रहालय भी कहा जाता है।

युद्ध संग्रहालय

  • 24 अगस्त, 2015 को जैसलमेर में स्थापित।
  • राजस्थान का प्रथम युद्ध संग्रहालय।
  • इस संग्रहालय में 1965 ई. में पाकिस्तान के साथ लड़े गये युद्ध में इस्तेमाल किए गए टैंकों, विमानों एवं सैन्य वाहनों का संग्रह मिलता हैं।

मीरा संग्रहालय

  • उदयपुर में स्थित।
  • प्रदेश का पहला मीरा संग्रहालय
  • इस संग्रहालय में मीरा बाई से जुड़ी ऐतिहासिक एवं साहित्यिक साक्ष्य सामग्री संग्रहित की जा रही हैं।
  • एक अन्य मीरा संग्रहालय मेड़ता (नागौर) में भी है।

सरस्वती भण्डार

  • उदयपुर में स्थित।
  • इस भण्डार में राजस्थानी भाषा में रासो साहित्य एवं सचित्र पाण्डुलिपियाँ संग्रहित हैं।

रूपायन संस्थान

  • सन् 1960 में बोरूंदा (जोधपुर) में स्थापित।
  • यह संस्थान पाण्डुलिपियों के संरक्षण के लिए प्रयासरत हैं।
  • विजयदान देथा एवं कोमल कोठारी को संबंध इसी संस्थान से है।

राजस्थानी शोध संस्थान

  • जोधपुर में स्थित।

चित्रशाला

  • बूँदी में स्थित
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