राजस्थान में पुरातात्विक स्थल कालीबंगा

mygkbook की पिछली पोस्ट में हमने आप को राजस्थान का इतिहास में जैन साहित्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी।

कालीबंगा सभ्यता ( kalibangan )

इस पोस्ट में विश्व प्रसिद्ध kalibangan के बारे में जानकारी देंगे। आप ने हमारी पिछली पोस्ट को अगर नहीं पढ़ा हे तो आप gk book पर क्लिक करके हमारी पोस्ट को पढ़े सकते है।

कालीबंगा सभ्यता कितनी पुरानी है?

राजस्थान में पुरातात्विक स्थल कालीबंगा कांस्ययुगीन सभ्यता मानी जाती है। कालीबंगा सभ्यता का समय 2350 ई.पू. से 1750 ई.पू. माना गया है। (कार्बन डेटिंग पद्धति के अनुसार) पुरातात्विक स्थल कालीबंगा प्राचीन सरस्वती (वर्तमान में घग्घर) नदी के बायें तट पर हनुमानगढ़ जिले में है।

सरस्वती नदी का सर्वप्रथम जानकारी ऋग्वेद के दसवें मण्डल में मिलता है। सरस्वती नदी की उत्पत्ति तुषार क्षेत्र से मानी गई है। सरस्वती नदी का वर्तमान स्वरूप घग्घर नदी है। घग्घर नदी को सोतर नदी, मृत नदी, लेटी हुई नदी, राजस्थान का शोक भी कहा गया है।

कालीबंगा का अर्थ क्या होता है?

  • सरस्वती (दृषद्वती) नदी के तट पर (वर्तमान घग्घर नदी) विकसित कालीबंगा सभ्यता है।
  • कालीबंगा का अर्थ- काली चूड़ियाँ।

कालीबंगा क्यों प्रसिद्ध है?

 kalibangan
कालीबंगा-सभ्यता
  • कालीबंगा सैन्धव सभ्यता का पाँचवा महत्वपूर्ण नगरमाना गया।
  • कालीबंगा सभ्यता सैन्धव सभ्यता से भी प्राचीन मानी जाती है।
  • विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं के समकक्ष मानी जाती है।
  • सैन्धव सभ्यता की तीसरी राजधानी कालीबंगा को माना गया है। (पहली-हड़प्पा, दूसरी-मोहनजोदड़ो)
  • कालीबंगा सभ्यता के मकानों में साधारण चुल्हे के अलावा तन्दुरी चुल्हे के साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं।
  • कालीबंगा सभ्यता से प्राप्त एक मुहर पर व्याघ्र का अंकन है जबकि सिन्धु क्षेत्र में व्याघ्र नहीं मिलता है।
  • कालीबंगा सभ्यता पर राजस्थान सरकार द्वारा यहाँ से प्राप्त पुरावशेषों के संरक्षण हेतु एक संग्रहालय की स्थापना की गयी।
  • कालीबंगा सभ्यता के परकोटे के बाहर एक जुते हुए खेत के अवशेष मिले हैं, जो विश्व प्राचीन जुते हुए खेत का पहला प्रमाण है।
  • कालीबंगा सभ्यता से प्राप्त जुते हुए खेत में चना व सरसों बोया जाता था।
  • कालीबंगा सभ्यता से मिट्‌टी के भाण्डों एवं मुहरों पर लिपी के अवशेष मिले हैं।
  • कालीबंगा सभ्यता से बेलनाकार तंदूरा भी मिला है।
  • कालीबंगा सभ्यता निवासी गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सुअर के साथ-साथ ऊँट एवं कुत्ता भी पालते थे।
  • पाकिस्तान के कोटदीजी नामक स्थान पर प्राप्त पुरातात्विक अवशेष कालीबंगा सभ्यता के अवशेषों से काफी मिलते थे।
  • कालीबंगा सभ्यता के नगरों की सड़कें समकोण पर काटती थी।
  • कालीबंगा सभ्यता में दो टीलों पर उत्खनन कार्य किया गया, पश्चिम में स्थित पहला टीला छोटा एवं अपेक्षाकृत ऊँचा है तथा पूर्व में स्थित दूसरा टीला अपेक्षाकृत बड़ा एवं नीचा है।
  • कालीबंगा सभ्यता दोनों टीलें सुरक्षात्मक दीवार से घिरे हुए थे।
  • कालीबंगा सभ्यता के लाेगों ने समचतुर्भुजाकार रक्षा प्राचीर के अन्तर्गत आवासों का निर्माण किया।
  • इस सुरक्षा प्राचीर को 2 चरणों में बनाने के प्रमाण मिले हैं।
  • कालीबंगा सभ्यता के लोग कच्ची ईटों से बने मकानों में रहते थे तथा मकानों की नालियाँ, शौचालय तथा कुछ संरचनाओं में पक्की ईटों का प्रयोग किया गया है।
  • कालीबंगा सभ्यता में एक दुर्ग, बेलनाकार मुहरें, तांबे का बैल, जुते हुए खेत, सड़कें तथा मकानों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
  • कालीबंगा सभ्यता से सात अग्निवेदियाँ प्राप्त हुई हैं।
  • डॉ. दशरथ शर्मा ने कालीबंगा सभ्यता को सैंधव सभ्यता की तीसरी राजधानी कहा है (पहली हड़प्पा तथा दूसरी मोहनजोदड़ो)।  
  • कालीबंगा सभ्यता से उत्खनन में दोहरे जुते हुए खेत के अवशेष प्राप्त हुए हैं जो विश्व में जुते हुए खेत के प्राचीनतम प्रमाण है।
  • कालीबंगा सभ्यता से प्राप्त जुते हुए खेत में चना व सरसों बोया जाता था।
  • कालीबंगा सभ्यता में समकोण दिशा में जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले है।  
  • कालीबंगा सभ्यता से एक ही समय में दो फसलें उगाने के प्रमाण प्राप्त हुए हैं जिसमें गेहूँ तथा जौ एक साथ बोये जाते थे।
  • कालीबंगा सभ्यता एक नगरीय प्रधान सभ्यता थी तथा यहाँ पर नगर निर्माण नक्शे के आधार पर किया गया था।
  • कालीबंगा सभ्यतामें मकानों से गन्दे पानी को निकालने के लिए लकड़ी की नालियों का प्रयोग किया जाता था।
  • कालीबंगा सभ्यता के लोग मुख्यतया शव को दफनाते थे।  
  • कालीबंगा सभ्यता सैंधव सभ्यता का एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ से मातृदेवी की मूर्तियां प्राप्त नहीं हुई है।
  • कालीबंगा सभ्यता से मैसोपोटामिया की मिट्‌टी से निर्मित मुहर प्राप्त हुई है।

कालीबंगा सभ्यता की खोज कब हुई?

  • कालीबंगा की सर्वप्रथम खोज – 1951 ई. – अमलानन्द घोष द्वारा की गए। 1961-69 ई. में – ब्रजवासी लाल व बालकृष्ण थापर द्वारा खुदाई कार्य किया गया।
  • वर्ष 1961 में कालीबंगा अवशेष पर भारत सरकार द्वारा 90 पैसों का डाक टिकट जारी किया गया।
  • राज्य सरकार द्वारा कालीबंगा से प्राप्त पुरा अवशेषों के संरक्षण हेतु वर्ष 1985-86 में एक संग्रहालय की स्थापना की गई।
  • कालीबंगा सभ्यता की लिपि सैन्धवकालीन लिपि (ब्रूस्ट्रोफेदन लिपि) के समान थी जो दायें से बाऐं की ओर लिखी जाती थी। इस लिपि को अभी तक नहीं पढ़ा जा सका है।
  • राजस्थान में कालीबंगा नामक स्थान पर विशाल सांडों की जुड़वा पैरों वाली मिट्‌टी की मूर्ति मिली है।
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