राजस्थान में गणेश्वर सभ्यता

हमारी पिछली पोस्ट में हमने आप को बालाथल सभ्यता के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की थी। इस पोस्ट हम आप को सीकर जिले में स्थित गणेश्वर सभ्यता के बारे में जानकारी प्रदान करगे।

गणेश्वर सभ्यता

राजस्थान में गणेश्वर सभ्यता सीकर जिले में नीम का थाना स्थान से कुछ दूरी पर स्थित है

  • गणेश्वर सभ्यता से उत्खनन में ताम्रयुगीन उपकरण प्राप्त हुए हैं।
  • गणेश्वर सभ्यता कांतली नदी के किनारे स्थित है।
  • गणेश्वर सभ्यता को पूर्व हड़प्पा कालीन सभ्यता माना गया है।
  • गणेश्वर सभ्यता 2800 ईसा पूर्व में विकसित हुई थी।
  • गणेश्वर सभ्यता को ‘पुरातत्व का पुष्कर’ भी कहा जाता है।
  • भारत में पहली बार किसी स्थान से इतनी मात्रा में ताम्र उपकरण प्राप्त हुए हैं।
  • गणेश्वर सभ्यता से तांबे का बाण एवं मछली पकड़ने का कांटा प्राप्त हुआ है।
  • इन उपकरणों में तीर, भाले, सूइयां, कुल्हाड़ी, मछली पकड़ने के कांटे आदि शामिल है।
  • गणेश्वर सभ्यता को भारत में ‘ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी’ कहा जाता है।
  • गणेश्वर सभ्यता के उत्खनन कार्य रत्नचंद्र अग्रवाल द्वारा 1977 में तथा विस्तृत उत्खनन 1978-79 में विजय कुमार द्वारा करवाया गया था।
  • गणेश्वर सभ्यता से उत्खनन में जो मृदभांड प्राप्त हुए है उन्हें कपिषवर्णी मृदपात्र कहते हैं।
  • गणेश्वर सभ्यता से मिट्‌टी के छल्लेदार बर्तन भी प्राप्त हुए हैं।
  • गणेश्वर सभ्यता से काले एवं नीले रंग से अलंकृत मृदपात्र मिले हैं।
  • गणेश्वर सभ्यता में बस्ती को बाढ़ से बचाने हेतु वृहदाकार पत्थर के बाँध बनाने के प्रमाण मिले हैं।
  • गणेश्वर सभ्यता में ईंटों के उपयाेग के प्रमाण नहीं मिले हैं।
  • मिट्‌टी के छल्लेदार बर्तन केवल गणेश्वर सभ्यता में ही प्राप्त हुए हैं।
  • गणेश्वर सभ्यता के उत्खनन से दोहरी पेचदार शिरेवाली ताम्रपिन भी प्राप्त हुई है।
  • गणेश्वर सभ्यता के लोग गाय, बैल, बकरी, सुअर, कुत्ता, गधा आदि पालते थे।
  • गणेश्वर सभ्यता को ‘ताम्र संचयी संस्कृति’ भी कहा जाता है।

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