भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन

यूरोपियों की प्रथम राजनैतिक हत्या 22 जून, 1897 को पूना में हुई इसमें प्लेग समिति के प्रधान श्री रैंड तथा लेफ्टिनेंट एयर्स्ट की हत्या चापेकर बंधुओं (दामोदर और बालकृष्ण) ने कर दी। इन दोनों को सरकार ने फांसी की सजा दी।

इसी कांड के पक्ष में लेख लिखने के कारण तिलक को 18 माह के कारावास की सजा भी दी गई थी। जून, 1908 में पुनः राजद्रोह के आरोप में तिलक को छः वर्ष की सजा दी गई।

भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन

वर्ष 1908 मुजफ्फरपुर के एक जज पर प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस ने बम से हमला किया। प्रफुल्ल चाकी ने आत्महत्या कर ली तथा खुदीराम बोस को फांसी दे दी गई।

वर्ष 1912 में वायसराय लार्ड हार्डिंग पर बम फेंका गया। इस कांड के पीछे रास बिहारी बोस की योजना थी। इस कांड में अमीरचंद, अवध बिहारी तथा बसंत कुमार विश्वास को फांसी दी गई।

वर्ष 1924 में समस्त क्रांतिकारी दलों का कानपुर में एक सम्मेलन बुलाया गया। चन्द्रशेखर आजाद की अध्यक्षता में हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन की स्थापना हुई।

अगस्त, 1925 में क्रांतिकारियों ने सहारनपुर-लखनऊ लाइन पर काकोरी जाने वाली ट्रेन को लूट ली, काकोरी कांड में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खाँ, राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी और रोशन सिंह को फांसी की सजा दी गई।

भगत सिंह के नेतृत्व में नवम्बर, 1928 में पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या कर दी गई। सांडर्स द्वारा किये गए लाठीचार्ज में लाला लाजपतराय की मृत्यु हुई थी।

8 अप्रैल, 1929 को सरदार भगत सिंह तथा बटुकेश्वर दत्त ने सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली में बहरी ब्रिटिश सरकार को जन आकांक्षाओं से परिचित कराने के लिए बम फेंका। सांडर्स हत्याकांड तथा लाहौर षड्यंत्र के तहत 23 मार्च, 1931 को भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू को फांसी दे दी गई।

बंगाल में अप्रैल, 1930 में मास्टर सूर्यसेन ने चटगाँव शास्त्रागार पर धावा बोला तथा अपने को प्रान्तीय स्वतंत्र भारत सरकार का प्रधान घोषित कर दिया। वर्ष 1933 में उन्हें भी फांसी पर लटका दिया गया।

क्रांतिकारियों पर हुए मुकदमे

नासिक षड्यन्त्र केस 1909 -10 ई.       विनायक सावरकार को निर्वासन, अन्य 26 को कारावास।
अलीपुर या मानिकतल्ला षड्यंत्र केस।1908 ई. अरिवंद घोष सहित कई व्यक्तियों पर चलाया
हावड़ा षड्यंत्र केस 1910 ई.जतीन मुखर्जी मुख्य अभियुक्त थे।
ढ़ाका षड्यंत्र केस1910 ई.पुलिनदास को 7 वर्ष की सजा, मास्टर अमीन चन्द्र, अवध बिहारी एवं बाल मुकुन्द को फांसी।
काकोरी षड्यंत्र केस1925 ई.राम प्रसाद बिस्मिल व अशफाक को फांसी।
क्रांतिकारियों पर हुए मुकदमे

विदेशों में क्रांतिकारी गतिविधियाँ

1905 ई. में लंदन में श्यामजी कृष्णवर्मा ने इंडियन होमरूल सोसायटी की स्थापना की। सावरकर, सरदार सिंह राणा तथा मदनलाल ढींगरा जैसे क्रांतिकारी इस संगठन से सम्बद्ध थे।

सर विलियम कर्जन वायली की जून, 1909 में की गई हत्या के आरोप में मदनलाल ढींगरा को फांसी दे दी गई।

सन् 1913 में लाला हरदयाल ने सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में गदर पार्टी की स्थापना की।

गुरुदीप सिंह द्वारा 376 यात्रियों को जलमार्ग द्वारा बैकूबर ले जाने पर कामागाटामारू घटना हुई (1914 ई.)। कामाकाटामारू जहाज का नाम था, जिसे कनाडा में रुकने नहीं दिया गया।

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