पुनर्जागरण तथा समाज सुधार आन्दोलन

आधुनिक शिक्षा तथा पाश्चात्य देशों के सम्पर्क से आधुनिक शिक्षा प्राप्त लोगों में सामाजिक चेतना जागी। उन्होंने अनुभव किया कि रूढ़िवादिता व अंधविश्वासों के कारण ही भारतीय समाज पिछड़ा हुआ है।

इस जागृति के फलस्वरूप भारत में पुनर्जागरण की लहर चल पड़ी और समाज सुधार हेतु अनेक संगठनों ने आन्दोलन चलाए।

राजा राममोहन राय

भारतीय पुनर्जागरण के जन्मदाता। इन्होंने जाति प्रथा, सती प्रथा, मूर्ति पूजा आदि का विरोध किया। ये भारत में पत्रकारिता के जन्मदाता कहे जाते हैं। 1828 ई. में इन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की। इसका उद्देश्य शाश्वत सर्वाधार अपरिवर्त्य ईश्वर की पूजा थी, जो सारे विश्व का कर्त्ता और रक्षक है।

1833 ई. में ब्रिस्टल (इंग्लैंड) में इनकी मृत्यु हो गई। इस संस्था को 1842 ई. में महर्षि देवेन्द्र नाथ टैगोर ने नवजीवन प्रदान किया। केशव चन्द्रसेन ने आदि ब्रह्म समाज की स्थापना की।

प्रार्थना समाज

प्रार्थना समाज की स्थापना किसने की 1867 ई. में केशव चन्द्र सेन की प्रेरणा से बम्बई में प्रार्थना समाज की स्थापना की गई। इसके प्रमुख नेता महादेव गोविन्द रानाडे तथा एन. जी. चद्रावरकर थे।

आर्य समाज (1875 ई.)

आर्य समाज की स्थापना किसने की – इसके संस्थापक स्वामी दयानन्द थे। स्वामी दयानन्द के गुरु स्वामी विरजानन्द थे। स्वामी दयानन्द तथा उनके गुरु दोनों ही शुद्ध वैदिक परम्परा में विश्वास करते थे। आर्य समाज के नियम – उन्होंने ‘पुनः वेदों की ओर चलो’ तथा ‘हिन्दुओं के लिए भारत’ नारा दिया। स्वामी दयानन्द का वास्तविक नाम मूलशंकर था।

इनका जन्म 1824 ई. में गुजरात के मौरवी रियासत के निवासी एक ब्राह्मण कुल में हुआ। इन्होंने 1863 ई. में झूठे धर्म़ों की खण्डिनी पताका लहराई।

1875 ई. में प्राचीन वैदिक धर्म की पुनः स्थापना के लिए उन्होंने बम्बई में आर्य समाज की स्थापना की।

इन्होंने ‘सत्यार्थ प्रकाश‘ (हिन्दी) नामक पुस्तक लिखी, जिसे आर्य समाज की बाइबिल कहा जाता है। इनके अनुयायी स्वामी श्रद्धांनद ने शुद्धि आन्दोलन प्रारम्भ किया।

स्वामी श्रद्धानन्द ने गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना (हरिद्वार) 1902 ई. में की। वैलेन्टाइन शिरोल ने आर्य समाज को भारतीय अशान्ति का जन्मदाता कहा है।

रामकृष्ण मिशन

स्वामी विवेकानन्द ने अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस की स्मृति में 1896 ई. बेलूर (कलकत्ता) में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। 1893 ई. में शिकागों में धर्म़ों की संसद में भाग लेकर इन्होंने पाश्चात्य जगत को भारतीय संस्कृति व दर्शन से अवगत कराया।

थियोसोफिकल सोसायटी

एक रूसी महिला, मेडम एच. पी. ब्लावेट्स्की (1831-91 ई.) तथा एक अमरीकन सैनिक अफसर कर्नल एच. एस आल्कॉट ने 1875 ई. में संयुक्त राज्य अमेरिका में थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना की।

यह 1875 ई.में भारत आए और मद्रास के निकट में आड्यार में इसके मुख्य केन्द्र की स्थापना की। ऐनी बिसेंट ने 1886 ई. में इस सोसायटी में प्रवेश किया और चार साल बाद भारत में बस गई।

ऐनी बेसेंट ने बनारस में सेन्ट्रल हिन्दू स्कूल की स्थापना की, जो बाद में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के रूप में विकसित हुआ।

रहनुमाई माजदायान सभा

पारसियों में धर्म सुधार के लिए 1851 ई. में रहनुमाई माजदायान सभा की स्थापना बम्बई में नौरोजी फरदोनजी, दादाभाई नौरोजी, एम.एस. बंगाली और अन्य लोगों ने की।

सिक्खों में सुधार

उन्नीसवीं सदी के अंत में अमृतसर में खालसा कॉलेज की स्थापना यही से यह आन्दोलन आरम्भ हुआ। यह आंदोलन 1920 ई. में पंजाब में अकाली आन्दोलन से और तेज हो गए। इनका मुख्य उद्देश्य गुरुद्वारों के प्रबन्ध को स्वच्छ बनाना था। अकालियों ने 1922 ई. में नया सिख एक्ट बनाने को विवश किया।

अहमदिया आन्दोलन

19वीं शताब्दी का यह एक प्रसिद्ध मुस्लिम आन्दोलन था। इसके प्रवर्तक मिर्जा गुलाम अहमद (1839-1908 ई.) थे। यह आन्दोलन पंजाब के गुरुदासपुर जिले के अन्तर्गत कादियां नगर से हुआ।

सर सैयद अहमद

सैयद अहमद 1838 ई. में कम्पनी की नौकरी में आए तथा 1857 ई. के स्वामिभक्त बने रहे। 1857 के बाद उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य और मुसलमानों के बीच बेहतर संबंध बनाने का प्रयास किया।

विदेश से लौटने के बाद इन्होंने मुस्लिम समाज की कुरीतियाँ त्याग कर पाश्चात्य शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया। 1875 ई. में इन्होंने अलीगढ़ में ऐंग्लो मुस्लिम स्कूल की स्थापना की, जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के रूप में विख्यात हुआ।

सुधार आन्दोलन

राजा राम मोहन राय ने विलियम बैंटिक के काल में 1829 ई. में अधिनियम द्वारा सती प्रथा को समाप्त कर दिया। बालिका शिशु हत्या को 1765 ई. के बंगाल रेगुलेशन संख्या 21 द्वारा अवैध घोषित कर दिया गया।

1856 ई. के हिन्दू विधवा पुर्नविवाह अधिनियम के द्वारा विधवा विवाह को कानूनी मान्यता दे दी गई। इसमें ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महाराष्ट्र में केशव करवे ने महिलाओं के उत्थान के लिए बहुमूल्य प्रयास किए। 1899 ई. में पूणे में कर्वे ने एक हिन्दू विधवा गृह की स्थापना की थी।

वर्ष 1916  में कर्वे ने बम्बई में एक भारतीय महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की। वर्ष 1905 में भारतीय जनता के हितों की रक्षा के लिए गोपाल कृष्ण गोखले ने ‘सर्वेन्ट्स ऑफ इंडियन सोसायटी’ की स्थापना की। वर्ष 1911 में श्री नारायण राव मल्हार जोशी ने बम्बई में सामाजिक समस्याओं पर विचार के लिए सोशल सर्विस लीग (1910) की स्थापना की।

सत्यशोधाक समाज

इसकी स्थापना ज्योतिबा फुले ने महाराष्ट्र में की। फूले ने मानव के अधिकारों पर एवं जाति प्रथा के उन्मूलन पर जोर दिया। 

1851 ई. में पूना में अछूतों के एक स्कूल की स्थापना की गई। उन्होंने 1917 ई. में अब्राह्मणों के हितों के प्रसार के लिए जस्टिस (न्याय) नामक एक समाचार-पत्र प्रारम्भ किया। वर्ष 1932 में गाँधीजी ने अखिल भारतीय हरिजन संघ की स्थापना की।

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