विधिक अधिकार

विधिक अधिकार राजस्थान लोक सेवा गांरटी अधिनियम 2011

  • यह अधिनियम 14 नवम्बर, 2011 को राज्य में लागू हुआ। जिसमें प्रथमत: 15 विभागों की 108 सेवाएं अधिसूचित की गई।
  • इस एक्ट का मुख्य उद्देश्य “निर्धारित समय-सीमा में जनसेवाओं काे प्रस्तुत” करना है।

प्रावधान

  • वर्तमान में इस एक्ट में 25 विभागों की 221 सेवाएं शामिल है।
  • इसमें नागरिकों को निर्धारित समय-सीमा में यदि सेवा प्रदान नहीं हाेती है तो अपील का भी प्रावधान है।
  • पहली अपील 30 दिन के भीतर की जाती है और यदि अपील स्वीकार हो जाये तो 21 दिन में निपटारा करना होगा।
  • प्रथम अपील के निपटारें के बाद 60 दिन के भीतर दूसरी अपील की जा सकती है।
  • दूसरे अपीलीय अधिकारी को दीवानी न्यायालय की शक्तियां प्राप्त है जो 500 से लेकर 5000 तक संबंधित अधिकारी पर जुर्माना लगा सकता है।
  • शिकायतों के समाधान हेतु प्रत्येक विभाग में एक कार्मिक की नियुक्ति की जाती है।
  • सेवा तय समय में उपलब्ध करवायी जायेगी अन्यथा अधिकारी को कारण स्पष्ट करना होगा।
  • यदि वह सेवा प्रदान करने में अनावश्यक विलम्ब करता है तो प्रतिदिन 250/- का आर्थिक दण्ड का प्रावधान भी है।
  • नोटिस बोर्ड पर जनता के लिए महत्त्वपूर्ण सेवा की सूचना का उल्लेख किया जायेगा।

महत्त्व 

  • राज्य के लगभग सभी विभाग इसके अधीन आते हैं, इसलिए राज्य प्रशासन में समयबद्ध व कार्योन्मुखी संस्कृति का विकास होता है।
  • राज्य में अत्यधिक संवेदनशील व जवाबदेह प्रशासन विकसित होता है।
  • जनसमास्याओं का त्वरित समाधान होता है।
  • प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित होता है।
  • आमजन की शासकीय कार्यों तक पहुँच होती है।

राजस्थान जन सुनवाई का अधिकार अधिनियम-2012

  • यह अधिनियम 1 अगस्त, 2012 को राज्य में लागू किया गया था।
  • अधिनियम में विभिन्न स्तरों पर सुनवाई अधिकारी अपील अधिकारी नियत कर शिकायतों पर 15 दिन में सुनवाई की समय सीमा निर्धारित की गई है।
  • समयावधि में सुनवाई नहीं होने पर इस एक्ट में भी 2 अपीलों का प्रावधान किया गया है।

प्रावधान   

  • सुनवाई का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक विभाग में एक लोक सुनवाई अधिकारी नियुक्ति की जायेगी।
  • संबंधित अधिकारी पर यदि जनता की नहीं सुनी तो ₹5000 का जुर्माना का प्रावधान किया गया था।
  • सप्ताह में कम से कम दो दिन हर हाल में सुनवाई होगी।
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