Second Generation Computer

कम्प्यूटर की द्वितीय पीढ़ी ( second generation computers  , 1952 – 1964 ) – इस पोस्ट के माध्य्म से कम्प्यूटर की द्वितीय पीढ़ी के बारे मैं विस्तार जानकारी प्राप्त होगी। 

Second Generation Computer in Hindi 1952 – 1964 

द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर ट्रांजिस्टर पर आधारित थे। 1947 Bell Laboratories के तीन वैज्ञानिकों ने Transistor का आविष्कार किया। ट्रांजिस्टर एक अर्धचालक पदार्थ से बना होता हे। यह Vacuum Tubes की अपेक्षा अधिक विश्वसनीय व् छोटा होता था। इसके अतिरिक्त यह ऊर्जा कम निकालता था इसी कारण Transistors का  करने वाले कम्प्यूटर का आकार काम हो गया तथा उनकी क्षमता मैं भी वृद्धि हुई। इस समय स्मृति की तकनीक में भी सुधर हुए। 

History of Second Generation Computer in Hindi

1960 के दशक में पूर्णतया ट्रांजिस्टर तकनीक पर आधारित प्राथमिक मेमोरी उपलब्ध हो गए। सेकंडरी मोमेरी के लिए चुंबकीय टेप पर डिस्कों का प्रयोग प्रारम्भ हुआ था। जो आज भी प्रचलित हैं। 1957 मैं Magnetic disk से लोगों का परिचय एक तीव्र तथा आसान स्टोरेज माध्यम के रूप मैं हुआ। 

Software के क्षेत्र मैं हाई – लेवल प्रोग्रमिंग भाषाऐं जैसे FOTRAN , COBOL  , ALGOL  तथा SNOBOL का भी पर्दापण हुआ। ये प्रोग्रमिंग भाषाएँ अपनी पूर्वर्ती मशीन लैंग्वेज तथा असेंबली लैंग्वेज से अधिक आसान तथा ताकतवर थी।

  1. Hardware feature – Transistors, magnetic tapes, 
  2. Characteristics – Batch operating system, faster, smaller, and reliable than the previous generation, costly, 
  3. System name – Honeywell 400 , Honeywell 800   , CDC 1604 , IBM 7030 , IBM 70 , IBM 1400  , CDC 3600 , 

Second generation computers Notes

1887 में हर्मन हॉलेरिथ ने विधुत यांत्रिक कार्ड पंच टेबुलेटिंग मशीन बनाई जिसका उपयोग  1890 में अमेरिका के जन गणना विभाग द्वारा सम्बंधित आकड़ो को संकलित करने के लिए किया गया। 

गणना के लिए सर्वप्रथम उपयोग में आने वाला उपकरण एबेकस ( Abacus ) था। जिसका अविष्कार चीन में हुआ था। 

1943 में अमेरिका के हावर्ड विश्व विद्यालय के भौतिक विज्ञानी हावर्ड आइकन ने IBM के सहयोग से मार्क 1 नाम का विधुत यांत्रिक कम्प्यूटर बनाया। 

 चालर्स बैबेज ने 1821 में डिफ्रेंश इंजीन व 1833  एनेलेटिकल इंजिन बनाया जिन्हे आधुनिक कम्प्यूटर के पूर्वज कहा जाता है। 

सन 1700 ई में स्कॉटलैंड में गणितज्ञ जॉन नेपियर ने लघुगणक ( Logarithm ) बनाया तथा बाद में निपीयर्स बोन्स नामक गणना करने वाली एक ऐसी युक्ति बनाई जो बड़ी बड़ी तथा दशमलव वाली संख्याओं का आसानी से गुणा कर सकती है। 

1642 में ब्लेज पास्कल ने विश्व पहला यांत्रिक केलकुलेटर बनाया जो दशमलव प्रणाली की जोड़े बाकि कर सकता था इसे पास्कलाइन नाम दिया गया 

आधुनिक कम्प्यूटर ने सकल्पना को प्रतिपादित करने वाले चालर्स बबेज थे इन्हे कम्प्यूटर के जनक कहा जाता था। 

इलेक्ट्रानिक कम्प्यूटरों का अविष्कार लगभग सत्र वर्ष पूर्व हुआ। 

आधुनिक कम्प्यूटर की संकल्पना को सकारा होने में हजारों वर्ष लगे है। यह पिछले कई हजार वर्षो  अनके व्यक्तियों द्वारा किय गए अनगनित अविष्कार व विचारों का एक मेल है। 

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