Computer Language in Hindi

विचारों के आदान-प्रदान के लिए भाषा की आवश्यकता होती हैं। देशों में सामान्य बातचीत के लिए विभिन्न प्राकृतिक भाषाओं का प्रयोग किया जाता हैं। जैसे हिन्दी, जर्मन आदि। ठीक उसी प्रकार यदि हम कम्प्युटर से काम लेना चाहते हैं तो हमें उस भाषा का उपयोग करना होगा जो कम्प्युटर आसानी से समझ सके।

कम्प्युटर को उसकी भाषा में ही निर्देश देने पड़ते हैं। प्रत्येक भाषा की अपनी वर्णमाला व शब्दलिपि होती हैं। अतः किसी भी भाषा का उपयोग करने के लिए उसकी वर्णमाला एवं व्याकरण का ज्ञान होना आवश्यक हैं। व्याकरण में उस भाषा से संबंधित नियमों के उपयोगों को बताया जाता हैं।

Computer Language

ठीक उसी प्रकार कम्प्युटर की विभिन्न भाषाओं को उपयोग में लेने वाला व्यक्ति उस भाषा के शब्द और संकेतो का प्रयोग करते हुए कम्प्युटर से बातचीत करता हैं। वहीं कम्प्युटर की भाषा अच्छी होती हैं। जिसे कम्प्युटर पर काम करने वाला व्यक्ति आसानी से समझ सके और उसके अनुरूप प्रोग्राम बना सके।

Types of Computer Language in Hindi

  • Machine Language Or Binary Language
  • Assembly Language/Symbolic Language
  • High Level Language

What is Machine Language

Computer मशीन भाषा ही समझता हैं। यह भाषा कम्प्युटर द्वारा आसानी से समझी जाती हैं परन्तु यह मनुष्य के लिए अत्यन्त कठिन हैं। अन्य दोनों भाषाएं हमारे लिए उपयुक्त हैं। Assembly Language में Numeric (चिह्नों) का उपयोग होता हैं। चिह्नों को याद रखना सुविधाजनक होता हैं। परन्तु कम्प्युटर Assembly भाषा में लिखे गये निर्देशों को मशीन भाषा में परिवर्तित करना पड़ता हैं। मशीन व Assembly Language दोनो ही निम्न स्तरीय भाषा हैं-

वह भाषा जो कम्प्युटर सीधे ही समझ सकता हैं और उसमें लिखे निर्देशों को बिना किसी परिवर्तन के रन किया जा सकता हैं। मशीन भाषा कहलाती हैं। आरम्भिक कम्प्युटर में सभी प्रोग्राम मशीन कोड में लिखे गये जिनका विकास उन कम्प्युटर के निर्माताओं द्वारा किया गया था। प्रत्येक कम्प्युटर की अपनी अलग भाषा होती थी। जो उसकी आन्तरिक संरचना पर आधारित होती थी।

प्रोग्राम लिखने के लिए इस विशेष Machinary Language की समुचीत जानकारी होनी चाहिए और साथ ही साथ काम में आने वाले कम्प्युटर कि भी ज्ञान होना चाहिए। इस भाषा में लिखे गये प्रोग्राम केवल उन्हीं कम्प्युटर पर प्रयोग कर सकते थे। जिनके लिए वह प्रोग्राम बनाया गया हैं तथा उस कम्प्युटर का Hardware का ज्ञान होना जरूरी था।

Advantages of Machine Language in Hindi

  • मशीन भाषा का उपयोग करने पर कम्प्युटर द्वारा कार्य तीव्र गति से सम्पन्न किया जाता हैं, क्योंकि कम्प्युटर को CPU इस भाषा को सीधे समझने में सक्षम होता हैं और भाषा का अनुवाद करने के लिए अन्य प्रोग्राम की आवश्यकता नहीं होती हैं।
  • इस भाषा द्वारा कम्प्युटर के सभी भागों को निर्देश देकर व उनसे कार्य कराया जा सकता हैं।

दोष

  • मशीन पर आश्रित विभिन्न कम्प्यूटर का आंतरिक परिपथ Different होता हैं। अतः प्रत्येक कम्प्युटर को संचालित करने के लिए विभिन्न विद्युत संकेतो की आवश्यकता होती हैं। एक कम्प्युटर के लिए मशीन कोड में लिखा गया प्रोग्राम दूसरे कम्प्युटर पर नहीं चलता।
  • प्रोग्राम लिखना कठिन :- मशीनी भाषा को सीखना एक कठिन व मेहनत का कार्य हैं। मशीन कोड में प्रोग्राम लिखने से पूर्व कम्प्युटर के आन्तरिक परिपथ व कार्यप्रणाली का ज्ञान होना आवश्यक हैं। सामान्य लोग मशीन भाषा में लिखे प्रोग्राम को पढ़ व लिख ही नहीं सकते।
  • गलती का पता लगाना कठिन :- मशीन भाषा में लिखे गए प्रोग्राम में 0 तथा 1 की कई लम्बी पंक्तियां होती हैं। इस कारण गलती का पता लगाना बहुत कठिन होता हैं। यदि गलती से प्रोग्राम किसी स्थान में 0 के स्थान पर 1 लिख देती हैं तो इस गलती का पता लगाना एक कठिन कार्य हैं।
  • मशीन कोड में सुधार करना कठिन।

Assembly Language in Hindi Or Symbolic Language

मशीन भाषा के प्रयोग में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए उनमें सुधार करके जो Language बनाई गई उसे Assembly Language कहते हैं। इस भाषा में कम्प्युटर के गणितीय तथा तार्किक दोनों प्रकार के कार्यो के लिए प्रतीकों का उपयोग किया जाता हैं।

आसानी से याद किये जा सकने वाले प्रतीकों का उपयोग होने के कारण प्रोग्रामिंग का कार्य अत्यन्त सरल हो गया। परन्तु कम्प्युटर केवल Machinery Language ही समझ सकता हैं। अतः Assembly Language में दिये गये प्रोग्राम का Machine Language में अनुवाद करना आवश्यक हैं। इस कार्य को करने के लिए कुछ विशेष प्रोग्राम को प्रयुक्त किया जाता हैं। जिन्हें Assembler कहते हैं।

Advantages of Assembly Language in Hindi

  • समझने व उपयोग में आसान – चिह्नोंका उपयोग होने के कारण इस भाषा के उपयोग के लिए समझना अत्यन्त सरल हैं।
  • समय व श्रम की बचत – इस भाषा में प्रोग्राम लिखना Machine Laguage की अपेक्षा सरल होता हैं। इस कारण प्रोग्राम के समय व मेहनत में बहुत बचत होती हैं।
  • कार्य कुशलता में वृद्धि – Assembly Language में काम करने में समय की बचत होती थी तथा मशीन भाषा की अपेक्षा काम करना भी सरल होता हैं। जिससे ज्यादा समय तक शुद्धता से काम किया जा सकता हैं।

दोष

  • मशीन पर आश्रित
  • मशीन का ज्ञान होना आवश्यक
  • समय अधिक लगता हैं – Computer Machinery Language समझता हैं। अतः Assembly Language को Machinery Language में परिवर्तित करने के लिए Assembler का उपयोग करना पड़ता हैं। जिससे कार्य पूरा होने में अधिक समय लगता हैं।

High Level Language

वे भाषाएं जो सामान्य English Language के समान होती हैं और जिनमें लिखे गये निर्देश सीधे Run नहीं होते हैं। अर्थात् रन करने के लिए उन्हें मशीनी भाषा में Convert करना पड़ता हैं। High Level Language कहलाती हैं।

English Language का उपयोग होने के कारण यह अत्यन्त सरल होती हैं तथा Machine dependent नहीं होती हैं। High Level Language. जैसे :- Fortran, COBOL, BASIC, PASCAL, JAVA Etc.

High Level Language में लिखे प्रोग्राम को रन करने के लिए कुछ विशेष प्रोग्राम को प्रयुक्त किया जाता हैं। जिन्हें Compiler तथा Interpeter कहते हैं।

  • मशीन पर निर्भरता नहीं
  • सीखने व उपयोग में आसान
  • गलती खोजना आसान
  • Programming सस्ती
  • Good Documantation
  • रख-रखाव आसान

दोष

Processing में अधिक समय High Level Language को Machine Language में परिवर्तित करना। कुछ मुख्य High Level Languages निम्न हैं –

BASIC :- इसका पूरा नाम Beginners All purpose Symbolic Instruction Code हैं। यह काफी सरल भाषा हैं। इसका विकास 1965 में हुआ था। Microsoft द्वारा इसका नया संस्करण QBASIC निकाला गया। उसके बाद Microsoft द्वारा 1965 में Visual Basic विकसित की गई। Visual Basic (VB) ने Graphics User Interface को संभव कर दिखाया।

C :- इसका विकास Denis Richi ने 1972 में किया था। इस भाषा में काफी जटिल Program भी बनाये जा सकते हैं। AT & T द्वारा इस भाषा का Compiler बनाया गया। Compiler Programming को मशीनी भाषा में बदल देता हैं।

COBOL :- इसका पूरा नाम Common Business Oriented Language हैं। इसका उपयोग व्यावसायिक संस्थानों द्वारा खाता-बही, रोकड़ खाते, पंक्ति आदि में करते हैं। इसमें एल्फा-न्यूमेरिक शब्दों का अधिक अच्छा उपयोग होता हैं। इस भाषा में निर्देश अंग्रेजी भाषा में काफी मिलते-जुलते हैं।

FORTRAN :- इसका पूरा नाम Formula Translation हैं। यह वैज्ञानिक व इंजीनियरिंग कार्यों हेतु सर्वाधिक उपयोग की जाने वाली भाषा हैं। इसके द्वारा जटिल गणनायें भी सम्पन्न की जा सकती हैं।

PL (Programming Language) :- इसका विकास IBM ने 1965 में किया था। इसका उपयोग वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक दोनों प्रकार के कार्यों हेतु किया जाता हैं। इसमें दोनो FORTRAN व COBOL की विशेषताएं हैं।

4GL भाषायें :- 4GL भाषायें गैर–प्रक्रियागत एवं उद्देश्य अभिमुखी भाषाएं हैं। इसमें केवल यहीं बताते हैं कि क्या करना हैं। कैसे करना हैं यह बताने की आवश्यकता नहीं होती।

C++ :- यह C भाषा का एक विकसित रूप हैं। यह Object Oriented भाषा हैं। इसका विकास 1980 में हुआ था। इसमें Structred Programming की विशेषताएँ भी हैं।

JAVA :- इसका विकास SUN Micro System ने किया हैं। यह भाषा Internet के उपयोग हेतु काफी उपयोगी भाषा हैं। Internet Program JAVA में भी तैयार किये जाते हैं। इसके उपयोग हेतु Computer में JAVA Compiler का होना जरूरी हैं। JAVA Virtual Machine जो कि Computer Memory में स्थापित होती हैं, के उपयोग के कारण यह किसी भी Computer में उपयोग की जा सकती हैं।

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