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अभिप्रेरणा

अभिप्रेरणा किसी कार्य को प्रारंभ कर उसे जारी रखना निश्चित उद्देश्य तक पहुंचाने की प्रक्रिया को अभिप्रेरणा कहते हैं। अभिप्रेरणा किसी कार्य का प्रारंभ एवं अंत होती है। अभिप्रेरणा एक अंतरिक्ष शक्ति है जो व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। अभिप्रेरणा अंग्रेजी के MOTIVATION शब्द का हिन्दी रूपान्तरण है जिसका शाब्दिक अर्थ …

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अधिगम के सिद्धांत स्कीनर, हल, गुथरी

क्रिया प्रसुत सिद्धांत क्रिया प्रसुत सिद्धांत – स्कीनर – 1938 / सक्रिय अनुबंधन  / अधिगम का श्रृंखला सिद्धांत / R-S Theory सिद्धांत / अधिगम का नेमेतिक सिद्धांत क्रिया-प्रसुत से आशय – वह व्यवहार जिसका संचालन बिना उद्दीपक की उपस्थिति में होता है, क्रिया प्रसुत कहलाता है। स्कीनर का यह सिद्धांत थॉर्नडाइक व क्लार्क हल के सिद्धांत पर …

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अधिगम के सिद्धांत गैस्टाल्टवाद के अनुसार

अन्तदृष्टि/सुझ का सिद्धांत/गेस्टाल्ट सिद्धांत गेस्टाल्ट जर्मन भाषा का शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ समग्रकार/पूर्णाकार होता है। जर्मनी में 1920 में गेस्टाल्ट सम्प्रदाय का उदय हुआ। गेस्टाल्टवाद के जनक – वर्डीमर को माना जाता है। वर्डीमर की विचारधारा को कोहलर ने विकसित किया जिसे अन्तदृष्टि कहा गया। अन्तदृष्टि/सुझ से आशय – विभिन्न नवीन परिस्थितियों में समस्या …

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अधिगम का सोपानिकी सिद्धांत

अधिगम का सोपानिकी सिद्धांत रॉबर्ट गेने – कन्डीशन ऑफ लर्निंग – रॉबर्ट गेने ने अधिगम की सोपानिकी प्रक्रिया में अधिगम के आठ प्रकार बताये मिलर का सूचना प्रौद्योगिकी सिद्धांत – मिलर सूचना से आशय – किसी भी विषयवस्तु से संबंधित वह जानकारी जिसका किसी न किसी प्रकार का कोई न कोई अर्थ प्रकट होता हो तथा …

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क्षेत्रवादी के अनुसार अधिगम के सिद्धांत

सामाजिक विकास सिद्धांत बाण्डूरा (1977) कनाडा। समाज द्वारा मान्य व्यवहार को स्वीकार कर अमान्य व्यवहार को त्यागना ही सामाजिक विकास कहलाता है। बाण्डूरा के अनुसार बालक दूसरे के द्वारा किये जाने वाले कार्यों को देखकर उनका अनुकरण करना सीखता है। अत: बाण्डूरा के अनुसार बालक सर्वाधिक नकल/अनुकरण के माध्यम से सीखता है। बाण्डूरा ने अपने …

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अधिगम के सिद्धान्त थार्नडाइक

अधिगम के सिद्धांत – उद्दीपक अनुक्रिया सिद्धांत प्रवर्तक – 1898 ( थार्नडाइक अमेरिका ) उद्दीपक अनुक्रिया से आशय किसी उद्दीपक के माध्यम से अनुक्रिया का होना ही उद्दीपक अनुक्रिया कहलाती है। थॉर्नडाइक ने अपने सिद्धांत में अनुक्रिया से पूर्व उद्दीपक की उपस्थिति पर सर्वाधिक बल दिया। क्योंकि थॉर्नडाइक के अनुसार उद्दीपक के अभाव में अनुक्रिया …

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अधिगम के सिद्धांत पावलव

अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत व्यवहारवाद के अनुसार – अधिगम के सिद्धांत अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत (C-R-Theory)   शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत प्राचीन अनुबंधन सिद्धांत अनुबंधन सिद्धांत पावलॉव ( रूस ) 1900 अनुकूलित अनुक्रिया से आशय – किसी अस्वाभाविक उद्दीपक द्वारा स्वाभाविक क्रिया का होना। पावलॉव के सिद्धांत में घंटी एक अस्वाभाविक उद्दीपक है। अर्थात् जो क्रिया पूर्व में भोजन को …

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अधिगम – अधिगम के सिद्धांत

अधिगम क्या है अधिगम एक ऐसी मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति परिपक्वता की ओर बढ़ते हुए तथा अपने अनुभवों से लाभ उठाते हुए व्यवहार में परिमार्जन करता है। अधिगम एक मानसिक प्रक्रिया है जिससे व्यक्ति वातावरण से ज्ञान ग्रहण कर अपने व्यवहार में परिवर्तन करता है। अधिगम का अर्थ – सीखना/अधिगम अधिगम का शाब्दिक अर्थ सीखना/सीखकर व्यवहार में परिवर्तन करना/नवीन ज्ञान अर्जित करने की प्रक्रिया से होता है। अधिगम की परिभाषा वुडवर्थ – सीखना विकास की प्रक्रिया है। गिलफोर्ड – व्यवहार द्वारा व्यवहार में परिवर्तन करने की प्रक्रिया अधिगम कहलाती है। क्रॉनबेक – अनुभव के परिणाम स्वरुप व्यवहार को परिवर्तन की प्रक्रिया अधिगम कहलाती है। गेट्स – अनुभव एवं प्रशिक्षण के द्वारा व्यवहार में परिवर्तन की प्रक्रिया अधिगम कहलाती है। पावलॉव – अनुकूलित अनुक्रिया के परिणाम स्वरुप व्यवहार में परिवर्तन की प्रक्रिया अधिगम कहलाती है। क्रो एवं क्रो – आदत, ज्ञान, अभिरुचि, अभिवृत्ति में वृद्धि की प्रक्रिया अधिगम कहलाती है। वुडवर्थ – नवीन परिस्थितियों में नवीन ज्ञान अर्जित करने की प्रक्रिया अधिगम कहलाती है। अधिगम की विशेषतायें सीखना सार्वभौमिक प्रक्रिया है। सीखना वातावरण की उपज है। सीखना जीवन पर्यन्त चलता रहता है। सीखना बुद्धि में विकास करना है। सीखना व्यवहार में परिवर्तन करता है। सीखना अनुभवों का संगठन है। सीखना एक खोज है। अधिगम सक्रिय रहकर किया जाता है। अधिगम में समय लगता है। अधिगम में अपेक्षाकृत स्थाई परिवर्तन होते हैं। अधिगम के प्रकार अभिप्रेरणा विभिन्न अनुक्रियाऐें बाधायें पुनर्बलन अनुभवों का संगठन लक्ष्य अधिगम वक्र अधिगम वक्र शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम एबिंगहास एवं जेरोम ब्रूनर द्वारा किया गया। बालक बालिकाओं के द्वारा किये जाने वाले अभ्यास के उपरांत सीखी जाने वाली विषय वस्तु के परिणाम को व्यक्त करने वाला वक्र अधिगम वक्र कहलाता है। यह 4 प्रकार के बनते हैं। त्वरण/सरल रेखीय वक्र …

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भाषाई विकास सिद्धांत

बाल-विकास के सिद्धांत भाषाई विकास सिद्धांत, मनोसामाजिक विकास सिद्धांत, नैतिक विकास सिद्धांत  भाषाई विकास सिद्धांत नाम चामोत्स्की को भाषाई विकास का जनक माना जाता है। चामोस्त्की का मानना था कि बालक में भाषा ग्रहण करने की जन्मजात प्रवृत्ति होती है जिसे भाषा अर्जन तंत्र (LAD) कहते हैं। चामोत्स्की एक भाषाविद् थे। चामोत्स्की के अनुसार – …

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नैतिक विकास सिद्धांत

लॉरेन्स कॉहलबर्ग का मानना है कि बालक के नैतिक विकास को समझने के लिए उसके तर्क व चिंतन का विश्लेषण करना आवश्यक है और इस आधार पर उन्होंने नैतिक विकास सिद्धांत की 6 अवस्थाएँ बनायी है तथा उन्हें (3) स्तरों में विभक्त किया। प्री कन्वेशन स्तर/पूर्व परम्परागत स्तर 4-10 वर्ष इस स्तर में बालक के …

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